by-Ravindra Sikarwar
ग्वालियर: ग्वालियर की क्राइम ब्रांच ने एक सनसनीखेज कार्रवाई में नकली पुलिस गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) अधिकारियों के वेश में हाईवे पर वाहन चालकों से उगाही कर रहा था। इस ऑपरेशन में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक फर्जी थाना प्रभारी (TI) और कथित कांस्टेबल शामिल हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से जाली नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। यह गिरोह हाईवे पर गश्त करने की योजना बना रहा था, और अब जांचकर्ता इसकी संभावित व्यापक धोखाधड़ी नेटवर्क से संबंधों की पड़ताल कर रहे हैं।
घटना का विवरण:
क्राइम ब्रांच को पिछले कुछ हफ्तों से ग्वालियर के हाईवे क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि कुछ लोग पुलिस और RTO अधिकारियों की वर्दी में वाहनों को रोककर चालकों से अवैध वसूली कर रहे थे। इन शिकायतों के आधार पर, क्राइम ब्रांच ने एक विशेष जांच दल का गठन किया और गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया।
गुरुवार देर रात, पुलिस ने ग्वालियर के बाहरी इलाके में एक गुप्त ऑपरेशन चलाया, जहां चार संदिग्धों को पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान रामेश्वर सिंह (फर्जी TI), अजय यादव, सुरेश चौहान और राकेश मिश्रा के रूप में हुई है। ये लोग पुलिस की वर्दी और जाली RTO बैज के साथ हाईवे पर एक चेकिंग पॉइंट स्थापित करने की तैयारी कर रहे थे।
बरामद सामग्री और गिरोह का तरीका:
पुलिस ने छापेमारी के दौरान इनके कब्जे से कई जाली दस्तावेज बरामद किए, जिनमें फर्जी पुलिस नियुक्ति पत्र, RTO अधिकारी के पहचान पत्र, और जाली सरकारी स्टांप शामिल थे। इसके अलावा, एक नकली पुलिस जीप, सायरन, और वायरलेस सेट भी जब्त किए गए, जिनका उपयोग ये लोग अपनी धोखाधड़ी को विश्वसनीय बनाने के लिए करते थे।
जांच से पता चला कि यह गिरोह रात के समय व्यस्त हाईवे पर वाहनों, विशेष रूप से ट्रकों और मालवाहक वाहनों को निशाना बनाता था। ये लोग चालकों को नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर उनसे नकदी और सामान की उगाही करते थे। कुछ मामलों में, उन्होंने चालकों को डराने के लिए नकली हथियारों का भी इस्तेमाल किया। गिरोह का नेतृत्व करने वाला रामेश्वर सिंह पहले भी छोटे-मोटे अपराधों में शामिल रहा है और उसने इस धोखाधड़ी के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क बनाया था।
पुलिस की कार्रवाई और जांच:
ग्वालियर क्राइम ब्रांच के डीएसपी विनोद सिंह ने बताया कि इस गिरोह का भंडाफोड़ एक लंबी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया। “हमने कई दिनों तक इनके मूवमेंट पर नजर रखी और सही समय पर कार्रवाई की। ये लोग न केवल ग्वालियर, बल्कि आसपास के जिलों में भी सक्रिय थे,” उन्होंने कहा। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि ये लोग मध्य प्रदेश के अन्य शहरों और पड़ोसी राज्यों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी कर चुके हैं। पुलिस ने उनके बैंक खातों और मोबाइल डेटा की जांच शुरू कर दी है ताकि उनके सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा सके।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव:
इस घटना ने ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में हाईवे यात्रियों, विशेष रूप से ट्रक चालकों, में भय का माहौल पैदा कर दिया था। स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने इस कार्रवाई की सराहना की है, लेकिन साथ ही उन्होंने हाईवे पर नियमित पुलिस गश्त और चेकिंग पॉइंट्स की मांग की है। कई चालकों ने बताया कि इस तरह के फर्जी गिरोहों के कारण उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा था, क्योंकि वे बार-बार उगाही का शिकार हो रहे थे।
ग्वालियर के जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि हाईवे पर सुरक्षा बढ़ाई जाए। इसके अलावा, RTO और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से एक जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बना रहे हैं ताकि चालकों को फर्जी अधिकारियों से सावधान रहने के लिए शिक्षित किया जा सके।
भविष्य के लिए कदम:
यह घटना हाईवे पर होने वाली धोखाधड़ी और अपराधों को रोकने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस और प्रशासन ने निम्नलिखित उपायों पर विचार करने की बात कही है:
- हाईवे पर नियमित और आकस्मिक पुलिस गश्त बढ़ाना।
- चालकों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करना, जहां वे संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत दर्ज कर सकें।
- RTO और पुलिस अधिकारियों के लिए पहचान पत्रों की डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करना।
- जागरूकता अभियान चलाकर वाहन चालकों को फर्जी अधिकारियों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित करना।
ग्वालियर क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने न केवल एक खतरनाक गिरोह का पर्दाफाश किया, बल्कि यह भी दिखाया कि सतर्कता और खुफिया जानकारी के साथ अपराध को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने के लिए कितने ठोस कदमों की जरूरत है। पुलिस की यह सफलता निश्चित रूप से हाईवे यात्रियों में भरोसा जगाएगी, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
