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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक ऐतिहासिक फैसले में बैंकों व वित्तीय कंपनियों को चांदी के गहनों, सिक्कों और अन्य वैध संपत्तियों के बदले ऋण देने की छूट दे दी है। यह प्रावधान “आरबीआई (सोना व चांदी संपार्श्विक पर ऋण) निर्देश, 2025” के अंतर्गत आता है, जो 1 अप्रैल 2026 से चालू होगा। पहले चांदी को ऋण के लिए संपार्श्विक के रूप में मान्यता नहीं मिली थी, लेकिन अब यह सोने के समकक्ष हो गई है। इस कदम से छोटे व्यापारी, शिल्पकार और किसान सुलभ क्रेडिट प्राप्त कर सकेंगे, विशेषकर उन इलाकों में जहां चांदी का प्रचलन ज्यादा है। आरबीआई का लक्ष्य उधार प्रक्रिया में स्पष्टता लाना, ग्राहकों की हिफाजत करना और धातु बाजार में प्रवाह को सुधारना है।

आरबीआई के मुताबिक, ये नियम सभी नियंत्रित इकाइयों (आरई) जैसे व्यावसायिक बैंक, ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक और एनबीएफसी पर लागू होंगे। दिशानिर्देशों में चांदी ऋण के लिए कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं, ताकि अतिऋणग्रहण रोका जा सके। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • चांदी की मात्रा सीमा: उधारकर्ता अधिकतम 10 किलो चांदी के आभूषण या सजावट की वस्तुएं गिरवी रख सकेंगे। चांदी के सिक्कों के लिए यह 500 ग्राम तक सीमित है। सोने की तुलना में यह 1 किलो आभूषण और 50 ग्राम सिक्के है।
  • लोन-टू-वैल्यू (एलटीवी) अनुपात: ऋण संपार्श्विक मूल्य का निर्धारित हिस्सा ही होगा। ₹2.5 लाख या कम के ऋण पर 85%, ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक पर 80%, और ₹5 लाख से ऊपर पर 75%। यह अनुपात ऋण की पूरी मुद्दत में कायम रखना जरूरी है। मूल्य में बदलाव पर अतिरिक्त गिरवी जमा कराना पड़ सकता है।
  • मूल्य निर्धारण नियम: चांदी की शुद्धता का परीक्षण प्रमाणित मूल्यांकनकर्ताओं (एसेर्स) द्वारा होगा। मूल्य मासिक औसत बाजार दर पर आधारित होगा, और ऋण के दौरान आकस्मिक जांच अनिवार्य है। उधारकर्ता की मंजूरी से अवधि में संपार्श्विक की पड़ताल भी संभव।
  • ऋण का उपयोग: ऋण केवल खपत, कारोबार या खेती के लिए हो सकेगा। सोना-चांदी खरीदने के लिए निषेध है। कच्ची चांदी (बुलियन) या उसके वित्तीय उत्पादों पर ऋण वर्जित है, ताकि सट्टा बाजार न बने।
  • संपार्श्विक संभाल: ऋण समापन पर संपार्श्विक उसी दिन या 7 कार्य दिवसों में वापस करना होगा। चूक पर ₹5,000 प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा। क्षति या हानि पर मुआवजा देना अनिवार्य। नीलामी प्रक्रिया खुली होनी चाहिए, और उधारकर्ता को पूर्व सूचना जरूरी।
  • क्रेडिट नीति: प्रत्येक संस्था को ठोस उधार नीति बनानी होगी, जिसमें एक व्यक्ति की सीमा, कुल पोर्टफोलियो सीमा, एलटीवी उल्लंघन के उपाय और मूल्यांकन मानक शामिल हों।

ये निर्देश जून 2025 में जारी हुए और अक्टूबर 2025 में संशोधित किए गए, जिसमें आभूषण निर्माताओं के लिए कुछ ढील दी गई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि कृषि व एमएसएमई ऋणों में चांदी का गिरवी रखना वैकल्पिक है और संपार्श्विक-रहित सीमा का उल्लंघन नहीं होगा। इससे किसानों को ₹2.5 लाख तक बिना गिरवी के ऋण मिलेगा, लेकिन इच्छा हो तो चांदी जमा कर सकते हैं।

जानकारों का अनुमान है कि यह नीति चांदी बाजार में गतिशीलता लाएगी, विशेषकर 2025 में चांदी के दामों के उछाल के बाद। चांदी ऋण सस्ते व अल्पकालिक होंगे, लेकिन संस्थाओं को भंडारण व ढुलाई जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। आरबीआई ने सभी को 1 अप्रैल 2026 तक व्यवस्था दुरुस्त करने का आदेश दिया है। उधारकर्ताओं को सुझाव है कि ऋण से पूर्व क्रेडिट स्कोर जांचें और एलटीवी का पालन करें। यह ढांचा वित्तीय समावेश को प्रोत्साहित करेगा और जोखिम नियंत्रण को सशक्त बनाएगा।

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