by-Ravindra Sikarwar
मणिपुर के हिंसा प्रभावित क्षेत्र से आने वाले 21 वर्षीय युवा शीतलजीत तोंगब्रम ने असाधारण दृढ़ता का परिचय देते हुए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में सफलता प्राप्त की और असम के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल किया। पिछले दो वर्षों से जातीय हिंसा के कारण राहत शिविर में रहने वाले शीतलजीत की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत विजय है, बल्कि मणिपुर में जारी सांप्रदायिक संघर्ष के बीच आशा की एक किरण के रूप में उभरी है। उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित कर रही है कि कठिनाइयों के बावजूद सपनों को हासिल किया जा सकता है।
शीतलजीत की प्रेरणादायक यात्रा:
शीतलजीत तोंगब्रम मणिपुर के इम्फाल घाटी क्षेत्र के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं। 2023 में मणिपुर में मेइतेई और कुकि समुदायों के बीच भड़के जातीय संघर्ष ने उनके परिवार और समुदाय को बुरी तरह प्रभावित किया। हिंसा के कारण उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा, और पिछले दो वर्षों से वे राज्य सरकार द्वारा संचालित एक राहत शिविर में रह रहे हैं। इन शिविरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, असुरक्षा, और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए शीतलजीत ने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
राहत शिविर में रहते हुए शीतलजीत को अध्ययन के लिए शांत वातावरण की कमी का सामना करना पड़ा। बिजली की अनियमित आपूर्ति, सीमित संसाधन, और परिवार की चिंताओं ने उनकी तैयारी को और कठिन बना दिया। फिर भी, उन्होंने प्रतिदिन 10-12 घंटे पढ़ाई की, ऑनलाइन लेक्चर और पुरानी किताबों का सहारा लिया। उनकी मां ने बताया, “वह रात भर जागकर पढ़ता था। हमारा पूरा परिवार उसके सपनों पर भरोसा करता है।” शीतलजीत का लक्ष्य हमेशा से डॉक्टर बनना था, ताकि वे अपने समुदाय की सेवा कर सकें।
NEET परीक्षा और सफलता का सफर:
NEET भारत की सबसे कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों छात्र भाग लेते हैं। 2025 की NEET परीक्षा में शीतलजीत ने कड़ी मेहनत के दम पर ऐसा स्कोर हासिल किया कि उन्हें असम के एक प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स के लिए सीट आवंटित हुई। उनका रैंक सामान्य श्रेणी में भी सम्मानजनक था, जो उनकी बुद्धिमत्ता और लगन को दर्शाता है।
परीक्षा की तैयारी के दौरान शीतलजीत ने कोचिंग संस्थानों की बजाय सेल्फ-स्टडी पर जोर दिया। उन्होंने फ्री ऑनलाइन रिसोर्सेस, यूट्यूब चैनल्स, और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का उपयोग किया। राहत शिविर के अन्य युवाओं को भी उन्होंने पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे शिविर में एक छोटा अध्ययन समूह बन गया। उनकी सफलता की खबर ने पूरे शिविर में खुशी की लहर दौड़ा दी।
मणिपुर के संदर्भ में प्रेरणा:
मणिपुर में 2023 से जारी जातीय हिंसा ने राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया है। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं, और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में शीतलजीत की कहानी आशा का संदेश देती है। यह दर्शाती है कि शिक्षा संघर्ष के बीच भी एक हथियार हो सकती है। राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा, “शीतलजीत जैसे युवा मणिपुर का भविष्य हैं। उनकी सफलता हमें बताती है कि एकता और मेहनत से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।”
शीतलजीत की कहानी ने अन्य विस्थापित युवाओं को भी प्रेरित किया है। राहत शिविरों में अब कई छात्र NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। गैर-सरकारी संगठनों ने भी उनकी कहानी को आधार बनाकर छात्रवृत्ति और कोचिंग कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है।
असम मेडिकल कॉलेज में नई शुरुआत:
असम के गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद शीतलजीत की जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। वे कहते हैं, “मैं मणिपुर लौटकर अपने लोगों की सेवा करना चाहता हूं। डॉक्टर बनकर मैं हिंसा के घावों को भरने में मदद करूंगा।” कॉलेज प्रशासन ने उन्हें विशेष सहायता प्रदान करने का वादा किया है, जिसमें छात्रावास और वित्तीय सहायता शामिल है।
निष्कर्ष:
शीतलजीत तोंगब्रम की NEET सफलता मणिपुर के दर्दनाक इतिहास में एक चमकदार अध्याय जोड़ती है। दो वर्षों के कष्ट, विस्थापन, और अनिश्चितताओं के बावजूद उन्होंने जो हासिल किया, वह असली साहस की मिसाल है। उनकी कहानी न केवल मणिपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे देश को बताती है कि शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मणिपुर में शांति की कामना करते हुए, शीतलजीत जैसे युवा ही राज्य के पुनर्निर्माण का आधार बनेंगे।
