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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश की बेटी और माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही भावना डेहरिया को आखिरकार राज्य का सर्वोच्च खेल सम्मान “विक्रम अवॉर्ड” मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को इस सम्मान को रोकने वाली याचिका को सिरे से खारिज करते हुए अंतरिम स्थगन आदेश हटा लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भावना डेहरिया का चयन पूरी तरह नियमों के दायरे में है और इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है।

न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता मधुसूदन पाटीदार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वर्ष 2023 की एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में विक्रम अवॉर्ड के लिए राज्य सरकार का निर्णय पूरी तरह वैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश पुरस्कार नियम-2021 के अनुसार एडवेंचर स्पोर्ट्स में केवल पिछले पाँच वर्षों की उपलब्धियों पर ही विचार किया जा सकता है। मधुसूदन पाटीदार ने माउंट एवरेस्ट पर 2017 में चढ़ाई की थी, जो पाँच साल की समय-सीमा से बाहर हो चुकी है। इसलिए वे इस पुरस्कार के लिए पात्र ही नहीं थे।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया था कि उन्हें पुरस्कार के लिए आवेदन करने का उचित अवसर नहीं दिया गया और नोटिस भी अपर्याप्त था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को भी सिरे से नकार दिया। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2021, 2022 और 2023 में लगातार विज्ञापन जारी कर आवेदन मंगवाए थे और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी। कोर्ट ने याचिका को “निराधार और निर्मूल” करार देते हुए खारिज कर दी।

भावना डेहरिया की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुनय श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भावना की उपलब्धि न केवल ताजा है बल्कि विश्व स्तर पर मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली है। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल श्रेय राज सक्सेना ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसे अदालत ने सराहा।

छिंदवाड़ा जिले के छोटे से गाँव तामिया की रहने वाली भावना डेहरिया ने न सिर्फ माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) फतह किया बल्कि सात महाद्वीपों की सबसे ऊँची पाँच चोटियों पर तिरंगा लहराया है। इनमें अफ्रीका की किलिमंजारो, ऑस्ट्रेलिया की माउंट कोज़िउस्को, यूरोप की माउंट एलब्रस और दक्षिण अमेरिका की अकोंकागुआ शामिल हैं। वह उत्तर अमेरिका और अंटार्कटिका की सर्वोच्च चोटियों पर भी चढ़ाई कर चुकी हैं।

खास बात यह है कि भावना मध्य प्रदेश से विक्रम अवॉर्ड की एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में सम्मानित होने वाली पहली महिला होंगी। वह राज्य की पहली ऐसी पर्वतारोही भी हैं जिन्होंने एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। उनके साथ उनकी चार साल की बेटी सिद्धि भी सुर्खियों में रहती है। माँ-बेटी दोनों “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की ब्रांड एंबेसडर हैं। भावना ने भारतीय हिमालय को दुनिया के सामने लाने के लिए एक अनोखा गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भावना डेहरिया ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि उन तमाम बेटियों के लिए है जो सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखती हैं। पहाड़ों ने मुझे सिखाया है कि ऊँचाई कोई मायने नहीं रखती, मायने रखता है हौसला और लगन। मैं मध्य प्रदेश सरकार और सभी शुभचिंतकों की आभारी हूँ।”

खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब जल्द ही भोपाल में आयोजित होने वाले विक्रम अवॉर्ड समारोह में भावना डेहरिया को सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के साथ उन्हें नकद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र, ब्लेजर और ट्रॉफी भी प्रदान की जाएगी।

राज्य में खेल जगत और पर्वतारोहण से जुड़े लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भावना जैसी खिलाड़ी युवाओं को न सिर्फ खेल के प्रति प्रेरित करती हैं बल्कि असंभव को संभव करने का साहस भी देती हैं।

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