EU: भारत-जर्मनी संबंधों में नई ऊर्जा, ट्रांजिट वीजा की छूट से यात्रा आसान
भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों (EU) को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा (12-13 जनवरी 2026) के दौरान दोनों देशों ने कुल 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की। इस दौरान भारतीय यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब जर्मनी के हवाई अड्डों से ट्रांजिट के दौरान अलग से वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी।
EU: चांसलर मर्ज की यात्रा और प्रमुख उपलब्धियां
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो एशिया में उनकी पहली यात्रा भी थी। अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान गांधी आश्रम का दौरा और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भागीदारी हुई। इसके बाद गंधीनगर में आयोजित वार्ता में रक्षा, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में गहन चर्चा हुई। यात्रा के दूसरे दिन मर्ज बेंगलुरु पहुंचे, जहां तकनीकी सहयोग पर फोकस रहा।
EU: ट्रांजिट वीजा छूट: भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा
इस यात्रा का सबसे लोगों से जुड़ा परिणाम ट्रांजिट वीजा में छूट है। अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों (जैसे फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख या बर्लिन) से होकर किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा (Schengen Type A) की आवश्यकता नहीं होगी। यह छूट तब लागू होगी जब यात्री अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट जोन में रहें, 24 घंटे के अंदर कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ें और देश में प्रवेश न करें। इससे पहले भारतीयों को अलग से वीजा आवेदन, फीस और समय की परेशानी झेलनी पड़ती थी, खासकर अमेरिका, यूरोप या अन्य लंबी दूरी की यात्राओं में। यह कदम लोगों-से-लोगों के संबंधों को मजबूत करेगा और यात्रा को सस्ता व सुगम बनाएगा।
समझौतों के प्रमुख क्षेत्र और सहयोग
19 समझौतों और घोषणाओं में रक्षा औद्योगिक सहयोग का रोडमैप, महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त घोषणा, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकास, दूरसंचार तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन हाइड्रोजन सहित) और उच्च शिक्षा में साझेदारी प्रमुख हैं। दोनों देशों ने एक CEO फोरम स्थापित करने पर भी सहमति जताई, जो व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती के लिए नया फ्रेमवर्क और कौशल साझेदारी पर फोकस किया गया, जो जर्मनी में कुशल भारतीय पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा।
आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया, जो द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाएगा। जर्मनी ने भारत को एक उभरते प्रमुख आर्थिक साझेदार के रूप में देखा, जबकि भारत ने जर्मन कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया। यह सहयोग रूस पर निर्भरता कम करने, तकनीकी नवाचार और सतत विकास पर केंद्रित है। दोनों देश 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों और 25 वर्षों की रणनीतिक साझेदारी का जश्न मना रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं और लोगों के लाभ
यह यात्रा भारत-जर्मनी संबंधों में नई गति लाई है। ट्रांजिट छूट से लाखों भारतीय यात्रियों को सालाना फायदा होगा, जबकि समझौते रक्षा उत्पादन, हरित ऊर्जा और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाएंगे। आने वाले महीनों में इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशंस जर्मनी में होंगे, जो इन समझौतों को और मजबूत बनाएंगे। कुल मिलाकर, यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक बंधनों को और गहरा करेगा।
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