By: Ravindra Sikarwar
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मासिक पेंशन में बड़ा बदलाव लाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में यह राशि 1,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव है। यह कदम महंगाई की बढ़ती दर और जीवनयापन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को मजबूत आर्थिक सहारा मिल सके।
कर्मचारी संघों का समर्थन
इस प्रस्ताव को कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स एसोसिएशन से व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा 1,000 रुपये की पेंशन बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में अपर्याप्त है। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। इसकी घोषणा आगामी नीतिगत बैठकों या केंद्रीय बजट सत्र में हो सकती है।
पात्रता की शर्तें
यह लाभ कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) के तहत मिलेगा, जो ईपीएफओ का हिस्सा है।
- लाभार्थी: ईपीएफओ से जुड़े निजी क्षेत्र के कर्मचारी जो योजना की पात्रता पूरी करते हैं।
- मुख्य शर्त: कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी होना अनिवार्य है।
- पेंशन शुरू होने की उम्र: सामान्यतः 58 वर्ष की आयु के बाद।
मौजूदा पेंशनर्स जो न्यूनतम पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, वे भी इस बदलाव से लाभान्वित हो सकते हैं। यह सुधार लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करेगा, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
अन्य सुधारों पर फोकस
ईपीएफओ अन्य क्षेत्रों में भी बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है:
- डिजिटल माध्यमों से पीएफ निकासी प्रक्रिया को सरल बनाना।
- पेंशन भुगतान को तेज और सुगम करना।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवाओं की पहुंच बढ़ाना।
इन कदमों का लक्ष्य सेवानिवृत्ति लाभों को अधिक पहुंचयोग्य और कुशल बनाना है।
यह प्रस्ताव यदि लागू होता है, तो निजी क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अंतिम अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

