by-Ravindra Sikarwar
कोयंबटूर (तमिलनाडु): तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक 21 साल के इंजीनियरिंग छात्र ने परीक्षा हॉल में एंट्री न मिलने पर डिप्रेशन में आकर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। यह हृदयविदारक हादसा 9 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे शहर के एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के मुख्य द्वार के ठीक बाहर हुआ। छात्र का नाम वेंकटेश्वरन पी. है, जो थिरुनेलवेली जिले का रहने वाला और बी.टेक (कंप्यूटर साइंस) का फाइनल ईयर स्टूडेंट था। उसे 80 फीसदी से ज्यादा जलने के साथ कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीएमसीएच) के बर्न आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वेंकटेश्वरन सेमेस्टर एग्जाम देने कॉलेज आया था, लेकिन अटेंडेंस कम होने की वजह से उसे हॉल टिकट नहीं दिया गया। कॉलेज के सख्त नियमों के मुताबिक 75 प्रतिशत अटेंडेंस जरूरी है, जबकि उसकी उपस्थिति सिर्फ 42 फीसदी थी। वह पिछले दो सेमेस्टर से डिप्रेशन में था, क्योंकि उसके पिता छोटे किसान हैं और पढ़ाई के लिए परिवार ने भारी कर्ज लिया था। परीक्षा से बाहर होने के बाद वह गेट के पास खड़ा रहा, फिर नजदीकी पेट्रोल पंप से 1 लीटर पेट्रोल खरीदा और अचानक खुद पर छिड़ककर माचिस जला ली।
सिक्योरिटी गार्ड और कुछ छात्रों ने फौरन कंबल व पानी से आग बुझाई, लेकिन तब तक वह बुरी तरह झुलस चुका था। एम्बुलेंस 15 मिनट में पहुंची और उसे सीएमसीएच ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उसके चेहरे, सीने, हाथ-पैरों पर थर्ड डिग्री बर्न हैं और वेंटिलेटर पर है। बर्न यूनिट के हेड डॉ. एस. रविकुमार ने कहा, “मरीज की हालत स्थिर मगर गंभीर है। अगले 48 घंटे निर्णायक हैं। हम स्किन ग्राफ्ट और इंफेक्शन रोकने पर जोर दे रहे हैं।”
पुलिस ने सरोजिनी नायडू रोड थाने में यूडी केस दर्ज किया और कॉलेज से अटेंडेंस शीट, हॉल टिकट रिजेक्शन पत्र व सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले लिए। वेंकटेश्वरन के पिता पी. पेरुमाल स्वामी ने बताया कि बेटा छह महीने से तनाव में था। वह रात-रात भर पढ़ता था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से क्लास नहीं जा पाता था। परिवार ने मेडिकल सर्टिफिकेट देकर छूट मांगी थी, मगर कॉलेज नहीं माना। पेरुमाल स्वामी ने आंसू भरी आंखों से कहा, “मेरा बेटा साल भर की मेहनत डूबने के डर से टूट गया। अगर कॉलेज ने एक मौका दिया होता, तो यह हादसा न होता।”
कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. के. सुंदरराजन ने दुख जताते हुए कहा, “हमारे नियम सबके लिए एक समान हैं। छात्र को दो बार चेतावनी दी गई थी। हमने काउंसलिंग भी ऑफर की थी, लेकिन वह नहीं आया।” लेकिन छात्रों के एक ग्रुप ने आरोप लगाया कि प्रशासन अटेंडेंस के नाम पर मानसिक प्रताड़ना करता है और गरीब छात्रों से भेदभाव करता है। कैंपस में प्रदर्शन शुरू हो गया है, और पुलिस ने अतिरिक्त फोर्स तैनात की है।
तमिलनाडु हायर एजुकेशन मिनिस्टर के. पोनमुडी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और कहा, “हम अटेंडेंस नियमों की समीक्षा करेंगे। सभी कॉलेजों में छात्रों के मेंटल हेल्थ के लिए काउंसलर अनिवार्य होंगे।” यह तमिलनाडु में परीक्षा-अटेंडेंस दबाव से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना है। पिछले महीने चेन्नई में एक एमबीए छात्र ने 7वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी, और अप्रैल में मदुरै में एक छात्रा ने जहर खा लिया था।
एनजीओ ‘हेल्थ फाउंडेशन’ की डायरेक्टर डॉ. प्रिया रमेश ने कहा, “75% अटेंडेंस का नियम पुराना पड़ चुका है। ऑनलाइन क्लास, स्वास्थ्य समस्या और पार्ट-टाइम जॉब करने वाले छात्रों को छूट मिलनी चाहिए। कॉलेजों को ग्रेस मार्क्स या सप्लीमेंट्री एग्जाम का विकल्प देना चाहिए।” वेंकटेश्वरन के दोस्तों ने सोशल मीडिया पर #SaveStudentsFromAttendancePressure कैंपेन चलाया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन फोन में एक वॉइस मैसेज मिला है जिसमें वह कह रहा है, “अगर मैं फेल हो गया, तो पापा का कर्ज कैसे चुकाऊंगा?” परिवार ने सरकार से मुफ्त इलाज और कॉलेज से मुआवजे की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
