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by-Ravindra Sikarwar

भारत के सेवा क्षेत्र ने पिछले छह वर्षों (2018-19 से 2023-24 तक) में रोजगार सृजन के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। नीति आयोग द्वारा प्रकाशित ‘सेवा क्षेत्र: रोजगार और विकास का इंजन’ नामक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में इस क्षेत्र ने लगभग ४ करोड़ (40 मिलियन) नई नौकरियाँ पैदा कीं, जो कुल औपचारिक एवं अनौपचारिक रोजगार वृद्धि का लगभग ६५% हिस्सा है।

प्रमुख उप-क्षेत्रों का योगदान:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटी-सक्षम सेवाएँ (IT & ITeS): इस क्षेत्र ने अकेले 1.8 करोड़ नौकरियाँ सृजित कीं। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं की वैश्विक मांग ने भारतीय कंपनियों को बड़े पैमाने पर भर्ती करने के लिए प्रेरित किया।
  2. वित्तीय सेवाएँ (BFSI): फिनटेक क्रांति, डिजिटल भुगतान (UPI), माइक्रोफाइनेंस और बीमा क्षेत्र के विस्तार से लगभग ७५ लाख नई नौकरियाँ उत्पन्न हुईं। ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग कॉरस्पॉन्डेंट्स और डिजिटल लेंडिंग एजेंट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
  3. ई-कॉमर्स एवं लॉजिस्टिक्स: अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जीओमार्ट जैसी कंपनियों के विस्तार से ६० लाख से अधिक नौकरियाँ पैदा हुईं, जिनमें डिलीवरी एक्जीक्यूटिव्स, वेयरहाउस कर्मी, डेटा एनालिस्ट्स और कस्टमर सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं।
  4. पर्यटन, आतिथ्य एवं खुदरा व्यापार: कोविड के बाद पर्यटन की रिकवरी से होटल, रेस्तरां, ट्रैवल एजेंसियाँ और रिटेल चेन्स में ५० लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। ‘इनक्रेडिबल इंडिया 2.0’ अभियान और घरेलू पर्यटन में वृद्धि ने इसमें योगदान दिया।
  5. स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएँ: टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स (बायजू, अनएकेडमी) और नर्सिंग स्टाफ की मांग से ४० लाख*नौकरियाँ उत्पन्न हुईं।

क्षेत्रीय वितरण:

  • दक्षिण भारत (कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु): कुल नई नौकरियों का ४२% 
  • पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गुजरात): २८% 
  • उत्तर भारत (दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश): १८% 
  • पूर्व एवं पूर्वोत्तर: १२% (वृद्धि दर सबसे तेज, पर आधार कम)

श्रमिकों का प्रकार:

  • कुशल (स्किल्ड): ५५% (सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, डेटा साइंटिस्ट्स, फाइनेंशियल एनालिस्ट्स) 
  • अर्ध-कुशल: ३५% (डिलीवरी एजेंट्स, कस्टमर केयर, रिटेल स्टाफ) 
  • निम्न-कुशल: १०% (सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपिंग)

नीतिगत सहयोग:

  • स्किल इंडिया मिशन के तहत १.२ करोड़ युवाओं को सेवा क्षेत्र हेतु प्रशिक्षित किया गया। 
  • प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का डेटा सेंटर्स एवं IT हार्डवेयर पर सकारात्मक प्रभाव। 
  • जीएसटी के बाद लॉजिस्टिक्स लागत में १४% कमी से ई-कॉमर्स विस्तार को बल।

आर्थिक प्रभाव:
सेवा क्षेत्र अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ५७% का योगदान देता है (2023-24)। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, मध्यम वर्ग के विस्तार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण यह क्षेत्र 2027 तक ५.५ करोड़ अतिरिक्त नौकरियाँ सृजित करने की क्षमता रखता है, जैसा कि नीति आयोग की भविष्यवाणी है।

इस प्रकार, सेवा क्षेत्र न केवल रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, बल्कि भारत को वैश्विक सेवा निर्यात हब के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

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