Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

उत्‍तर प्रदेश के फ़तेहाबाद इलाके में, एक्सप्रेसवे पर एक टोल प्लाज़ा (मुहैया करवाने वाली कंपनी Shri Sign & Datar Company द्वारा संचालित) के करीब 21 कर्मचारियों ने अपनी दिवाली बोनस की राशि को बहुत कम पाए जाने के कारण विरोध जताया। कर्मचारियों का कहना है कि इस वर्ष उन्हें सिर्फ ₹ 1,100 बोनस के रूप में दिया गया, जबकि पिछले वर्ष उन्हें कहीं ज्यादा राशि (लगभग ₹ 5,000) मिली थी।

कंपनी ने यह तर्क दिया कि उसने मार्च 2025 में ही इस टोल बूथ का संचालन संभाला है, इसलिए पूरे वर्ष के बोनस का दायित्व नहीं माना जा सकता।

टोल बूथ के कर्मचारियों ने इस असंतोष के चलते अपनी ड्यूटी स्थगित कर दी और सभी गेट खोल दिए — जिसकी वजह से हजारों वाहन बिना टोल शुल्क दिए उस बूथ से गुजर गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लगभग 5,000 + वाहनों ने शुल्क न देकर उस रात प्लाज़ा से गुजरने की सूचना है।

प्लाज़ा पर नियमित टोल संचालन बाधित हुआ, कर्मचारी अन्य टोल कर्मियों को बुलाए जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन विरोध कर रहे कर्मचारियों ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया।

घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उन्होंने यह माना कि यह असामाजिक प्रदर्शनी नहीं है — कर्मचारियों का विरोध शांतिपूर्ण था।

प्रबंधन तथा कर्मचारियों के बीच बातचीत बाद में हुई और कंपनी ने तुरंत **10 % वेतन वृद्धि** देने का आश्वासन दिया।

इसके बाद कर्मचारियों ने काम फिर से शुरू किया और टोल बूथ सामान्य संचालन में लौट आया।

कर्मचारियों की मांग थी कि दिवाली-बोनस या त्योहारीन इनाम उस श्रम-परिस्थिति एवं टोल आय को ध्यान में रखकर दिया जाए, क्योंकि वे हर दिन लंबी शिफ्ट लगाते हैं, वाहन-धुएँ के संपर्क में रहते हैं।

दूसरी ओर प्रबंधन ने कहा कि नई जिम्मेदारी मार्च से मिलने के कारण इस वर्ष बोनस का पूरा हिसाब नहीं था।

इस तरह से एक ऐसा विरोध हुआ जो सीधे कर्मचारियों के आर्थिक हक और श्रम-स्वीकृति से जुड़ा था, और उसने बिना हिंसा या बड़े व्यवधान के अपना असर दिखाया।

यह घटना यह दर्शाती है कि अवकाश-मौकों पर बोनस-योजनाओं की उम्मीदें कितनी संवेदनशील हो सकती हैं — खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो रोजाना वाहनों व ट्रैफिक माहौल में काम करते हैं। इस तरह का विरोध यह संकेत देता है कि सिर्फ वेतन ही नहीं बल्कि बोनस, सुविधा एवं सम्मान-भाव भी कर्मचारियों के मनोबल के लिए महत्वपूर्ण हैं।

टोल संचालन में एक रात की इस अनौपचारिक “मुक्त गेट” घटना ने यह सवाल उठाया है कि क्या टोल प्रबंधन एवं श्रमिक भागीदारों के बीच संवाद-मंच पर्याप्त है, और क्या प्रबंधन समय समय पर कर्मचारियों की अपेक्षाओं को पूरा कर पाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *