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By: Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज देशवासियों को बड़ी राहत वाली खबर दी है। अगले एक साल के अंदर भारत के सभी टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस और बिना रुकावट वाले हो जाएंगे। इसका मतलब है कि अब आपको टोल नाकों पर लंबी कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ेगा, न ही कैश निकालने की जरूरत पड़ेगी और न ही FASTag रिचार्ज भूलने की टेंशन रहेगी। गाडकरी ने कहा कि 2026 के अंत तक देश में विश्व स्तरीय GNSS-आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाएगा।

क्या है नया सिस्टम और कैसे काम करेगा?
वर्तमान में हम FASTag का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें गाड़ी के शीशे पर एक छोटा सा टैग लगा होता है और टोल प्लाजा पर स्कैनर उसे पढ़कर पैसे काट लेता है। लेकिन नई तकनीक इससे कई गुना आगे है। इसे ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित टोलिंग कहते हैं। इसमें:

  • आपकी गाड़ी में कोई अलग से टैग या डिवाइस लगाने की जरूरत नहीं होगी।
  • सैकड़ों सैटेलाइट आपकी गाड़ी की लोकेशन को ट्रैक करेंगे।
  • जैसे ही आप नेशनल हाईवे पर कोई पेड सेक्शन में प्रवेश करेंगे और बाहर निकलेंगे, सिस्टम अपने आप दूरी नाप लेगा।
  • तय दूरी के हिसाब से टोल की रकम सीधे आपके बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगी।
  • पूरा प्रोसेस कुछ सेकंड में हो जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा कि टोल कट गया।

गडकरी ने बताया कि इस तकनीक से “बूम बैरियर” भी हट जाएंगे। यानी टोल प्लाजा पर लेन भी नहीं बनेगी, गाड़ी बिना स्पीड कम किए 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार से निकल जाएगी।

देश को क्या-क्या फायदे होंगे?

  1. समय की बचत: अभी एक टोल पर औसतन 5-10 मिनट लग जाते हैं। देशभर में सालाना 2500 करोड़ लीटर से ज्यादा डीजल-पेट्रोल बेकार जलता है। नई व्यवस्था से यह बर्बादी खत्म हो जाएगी।
  2. ईंधन बचत: गडकरी के अनुसार हर साल करीब 35,000 करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीजल बचेगा।
  3. प्रदूषण में कमी: टोल पर खड़ी गाड़ियों से निकलने वाला धुआं बंद हो जाएगा।
  4. पारदर्शिता: अभी कई टोल पर कैश में हेराफेरी और टैक्स चोरी की शिकायतें रहती हैं। नया सिस्टम 100% डिजिटल और ट्रैकेबल होगा।
  5. एक देश-एक टोल: पूरे देश में एक ही दर और एक ही सिस्टम होगा, कोई कन्फ्यूजन नहीं।

अभी तक क्या हुआ, आगे क्या होना है?
पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही शुरू हो चुका है। बेंगलुरु-मैसूर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर GNSS टोलिंग का ट्रायल सफल रहा है। अब इसे पूरे देश के 1.40 लाख किलोमीटर से ज्यादा नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू किया जाएगा।

मंत्री जी ने बताया कि:

  • सभी नई गाड़ियों में GNSS ट्रैकिंग डिवाइस फैक्ट्री से ही फिट होगा।
  • पुरानी गाड़ियों के लिए सस्ते रेट्रोफिटमेंट किट उपलब्ध होंगे।
  • जिनके पास स्मार्टफोन नहीं होगा, उनके लिए भी आसान रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी।

गडकरी का विश्वास – “भारत बनेगा टोलिंग में विश्व गुरु”
नितिन गडकरी ने कहा, “दुनिया के कई विकसित देश आज भी पुराने टोल सिस्टम पर चल रहे हैं। भारत एक झटके में सबसे एडवांस्ड तकनीक अपना रहा है। हम अमेरिका, यूरोप से आगे निकल जाएंगे। यह आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल भारत की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो टोल ऑपरेटर नई व्यवस्था में सहयोग नहीं करेंगे, उनका कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे अपने वाहनों को जल्द से जल्द नए सिस्टम के लिए रजिस्टर करा लें।

अगले एक साल में जब आप हाईवे पर बिना रुके, बिना कतार के, बिना बैरियर के निकलेंगे तो याद रखिएगा – यह वही भारत है जो कभी लंबी लाइनों में घंटों खड़ा रहता था। नितिन गडकरी का यह ऐलान सिर्फ टोल की बात नहीं, बल्कि भारत की बदलती तस्वीर की कहानी है।

तैयार हो जाइए – 2026 में टोल प्लाजा सिर्फ इतिहास के पन्नों में रह जाएंगे!

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