by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग में एक क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में घोषणा की कि अगले 4 से 6 महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पेट्रोल और डीजल वाहनों के बराबर हो जाएगी। यह दावा बैटरी की लागत में तेजी से हो रही कमी और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों पर आधारित है। गडकरी ने कहा कि यह बदलाव न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद करेगा। इस घोषणा ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उत्साह पैदा कर दिया है, क्योंकि ईवी को अब तक उच्च लागत के कारण चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।
बैटरी लागत में कमी: ईवी की कीमतों का मुख्य कारण
गडकरी ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत में कमी का सबसे बड़ा कारण बैटरी की कीमतों में गिरावट है। वर्तमान में, बैटरी की लागत ईवी की कुल कीमत का लगभग 35-40% हिस्सा है। 2023 में लिथियम-आयन बैटरी की कीमत 140 डॉलर प्रति किलोवाट-घंटा थी, जो 2024 में घटकर 100-110 डॉलर प्रति किलोवाट-घंटा हो गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025 की पहली तिमाही तक यह 80-90 डॉलर तक गिर सकती है। गडकरी ने कहा, “जैसे-जैसे बैटरी की लागत कम होगी, इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल वाहनों की तुलना में सस्ते हो जाएंगे। अगले 4 से 6 महीनों में दोनों की कीमतें लगभग बराबर हो जाएंगी।”
इसके पीछे कई कारक हैं। पहला, भारत में स्थानीय बैटरी उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है। ओला इलेक्ट्रिक, रिलायंस और टाटा ग्रुप जैसी कंपनियां बैटरी निर्माण में निवेश कर रही हैं। दूसरा, वैश्विक स्तर पर लिथियम और अन्य कच्चे माल की कीमतें स्थिर हो रही हैं। तीसरा, तकनीकी नवाचारों ने बैटरी की ऊर्जा घनत्व को बढ़ाया है, जिससे छोटी और सस्ती बैटरी अधिक दूरी तय कर सकती हैं।
सरकार की नीतियाँ: ईवी को बढ़ावा देने का अभियान
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ लागू की हैं। फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME-III) योजना के तहत सब्सिडी को और विस्तार दिया गया है। इसके अलावा, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित किया है। गडकरी ने कहा कि सरकार 2030 तक परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन को 50% कम करने का लक्ष्य रखती है, और ईवी इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
राज्य सरकारें भी ईवी खरीद पर रोड टैक्स में छूट, मुफ्त पंजीकरण और सस्ते बिजली टैरिफ दे रही हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गडकरी ने जोर दिया कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को 2026 तक दोगुना किया जाएगा, जिससे ईवी मालिकों की रेंज चिंता कम होगी।
बाजार की स्थिति: टाटा, ओला और एमजी की रणनीतियाँ
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से बढ़ रहा है। टाटा मोटर्स की नेक्सन ईवी और टियागो ईवी जैसी गाड़ियाँ पहले ही लोकप्रिय हैं। ओला इलेक्ट्रिक ने अपनी सस्ती स्कूटर रेंज के साथ बाजार में धमाल मचाया है। एमजी मोटर और हुंडई जैसी कंपनियाँ भी जेडएस ईवी और कोना इलेक्ट्रिक के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगले छह महीनों में नई किफायती मॉडल लॉन्च होंगे, जो मध्यम वर्ग के लिए सुलभ होंगे।
वर्तमान में, एक मिड-रेंज इलेक्ट्रिक कार की कीमत 10-15 लाख रुपये है, जबकि पेट्रोल कार 8-12 लाख रुपये में उपलब्ध है। बैटरी लागत में कमी और उत्पादन बढ़ने से यह अंतर जल्द खत्म होगा। गडकरी ने कहा, “जल्द ही एक इलेक्ट्रिक कार की कीमत पेट्रोल कार जितनी होगी, और उसकी रनिंग कॉस्ट 1 रुपये प्रति किलोमीटर से भी कम होगी।”
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ:
इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत में कमी न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी वरदान है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ईवी शून्य उत्सर्जन करते हैं, जिससे प्रदूषण कम होगा। भारत, जो 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है, इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, ईवी की रनिंग कॉस्ट पेट्रोल वाहनों की तुलना में 70% तक कम है। उदाहरण के लिए, एक पेट्रोल कार का खर्च 6-8 रुपये प्रति किलोमीटर है, जबकि ईवी का 0.8-1.2 रुपये प्रति किलोमीटर।
आर्थिक रूप से, यह बदलाव भारत की तेल आयात पर निर्भरता को कम करेगा। 2024 में भारत ने 250 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ है। ईवी को अपनाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे।
चुनौतियाँ और समाधान:
हालांकि कीमतों में कमी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन चुनौतियाँ बाकी हैं। चार्जिंग स्टेशनों की कमी, विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों में, एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा, बैटरी रीसाइक्लिंग और डिस्पोजल की नीति अभी प्रारंभिक चरण में है। गडकरी ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर काम कर रही है, और 2026 तक 10,000 नए चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए भी नई नीतियाँ जल्द लागू होंगी।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया:
गडकरी की इस घोषणा ने सोशल मीडिया पर उत्साह पैदा किया है। #ElectricIndia और #EVForAll जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “अगर ईवी सचमुच पेट्रोल कार जितनी सस्ती हो जाएँगी, तो मैं तुरंत खरीदूंगा!” कुछ ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठाए, लेकिन कुल मिलाकर जनता में सकारात्मक माहौल है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे “हरित क्रांति” का अगला कदम बताया।
निष्कर्ष: भारत की हरित भविष्य की ओर कदम
नितिन गडकरी की यह घोषणा भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। अगले 4 से 6 महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें पेट्रोल वाहनों के बराबर होने से मध्यम वर्ग के लिए ईवी अपनाना आसान हो जाएगा। सरकार की नीतियाँ, उद्योग की मेहनत और तकनीकी प्रगति इस बदलाव को संभव बना रही हैं। यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि भारत को स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाएगा। जैसे-जैसे चार्जिंग नेटवर्क और बैटरी तकनीक में सुधार होगा, भारत वैश्विक ईवी क्रांति में अग्रणी बन सकता है।
