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by-Ravindra Sikarwar

देश में उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कल यानी 9 सितंबर, 2025 को होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण चुनाव से पहले, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सांसदों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें उन्हें मतदान की प्रक्रिया और रणनीति की बारीकियां समझाई गईं।

बीजेपी की कार्यशाला: मतदान की ट्रेनिंग और रणनीति:
बीजेपी की यह कार्यशाला 7 और 8 सितंबर को आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी बीजेपी सांसद, विशेषकर पहली बार चुने गए सांसद, मतदान के प्रोटोकॉल और तकनीकी पहलुओं को ठीक से समझ सकें।

  • उद्देश्य: कार्यशाला में सांसदों को मतदान करते समय बैलट पेपर को कैसे भरना है, चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए विशेष पेन का ही उपयोग कैसे करना है, और बैलट को सही तरीके से मोड़कर मतपेटी में कैसे डालना है, इन सभी बातों का प्रशिक्षण दिया गया। इसका लक्ष्य मतदान के दौरान होने वाली तकनीकी गलतियों और वोटों के अमान्य होने की संभावना को शून्य करना था।
  • प्रमुख नेताओं की उपस्थिति: इस कार्यशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी को एक आम कार्यकर्ता की तरह पीछे की पंक्ति में बैठे देखा गया, जिससे कार्यकर्ताओं में सादगी का संदेश गया।
  • चर्चा के विषय: उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति के अलावा, कार्यशाला में आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, रोजगार, सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग, संसदीय समितियों की कार्यशैली और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

मुकाबला और चुनावी समीकरण:
उपराष्ट्रपति चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन और विपक्ष के इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है।

  • एनडीए उम्मीदवार: एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सी. पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है।
  • विपक्षी उम्मीदवार: इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है।
  • चुनावी गणित: लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को मिलाकर बने निर्वाचक मंडल में एनडीए को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसे कुछ गैर-एनडीए दलों के समर्थन से एनडीए का पलड़ा भारी है, और माना जा रहा है कि सी. पी. राधाकृष्णन की जीत लगभग तय है।

यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य मतदान करेंगे, और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद भरा जाएगा।

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