by-Ravindra Sikarwar
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ठीक पहले राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है, जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग (ईसीआई) पर निशाना साधा है। 5 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने ‘एच-फाइल्स’ नामक डेटा प्रस्तुत कर दावा किया कि हरियाणा चुनाव 2024 में 25 लाख वोटों के साथ छेड़छाड़ की गई, और अब बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के जरिए भी यही साजिश रची जा रही है। इस पर चुनाव आयोग ने तीखा प्रहार किया, पूछा कि क्या राहुल SIR का समर्थन कर रहे हैं या विरोध—और विपक्ष पर ‘असंवैधानिक भाषा’ इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जो डुप्लिकेट वोटरों को हटाने के लिए आवश्यक है, और कांग्रेस ने इस दौरान एक भी अपील क्यों नहीं की। यह विवाद न केवल बिहार चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को हिला रहा है, जहां विपक्ष चुनावी धांधली का शिकार होने का दावा कर रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि और राहुल गांधी का दावा:
बिहार में SIR प्रक्रिया 1 अगस्त से 15 अक्टूबर 2025 तक चली, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना था। विपक्ष का आरोप है कि इसमें 65 लाख नाम, खासकर महिलाओं और प्रवासियों के, गलत तरीके से हटा दिए गए। राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा को केंद्र में रखते हुए कहा कि वहां 5.21 लाख डुप्लिकेट वोटर, 93,174 अमान्य पते वाले वोटर और 19.26 लाख बल्क वोटर मिले। उन्होंने फॉर्म 6 (नाम जोड़ने) और फॉर्म 7 (नाम हटाने) के दुरुपयोग का हवाला दिया, और दावा किया कि यह भाजपा की साजिश है। बिहार के संदर्भ में, राहुल ने कहा कि SIR के जरिए वोट चोरी की योजना है, और कांग्रेस की ‘वोटर अधिकारी यात्रा’ इसी के खिलाफ है।
प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी वेस्ट चंपारण में एक रैली में कहा कि एनडीए बिहार में ‘वोट चोरी’ से सरकार बनाना चाहता है, और ब्रिटिश राज जैसी स्थिति पैदा हो रही है। विपक्षी दलों ने ‘वोट चोरी से आजादी’ अभियान चलाया, जिसमें सोशल मीडिया पर प्रोफाइल पिक्चर बदलने की अपील की गई। राहुल ने इसे ‘हाइड्रोजन बम’ करार दिया, जो हरियाणा में कांग्रेस की हार को उलट सकता था।
चुनाव आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया:
चुनाव आयोग ने 5 नवंबर को ही एक बयान जारी कर राहुल के आरोपों को ‘भ्रामक’ और ‘असंवैधानिक’ बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “‘वोट चोरी’ जैसे अनुचित शब्दों का इस्तेमाल संविधान का अपमान है।” आयोग ने सवाल उठाया कि SIR, जो डुप्लिकेट वोटरों को हटाने के लिए है, का राहुल समर्थन कर रहे हैं या विरोध? उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेश पर आधारित है, और बिहार में यह पारदर्शी तरीके से चली। आयोग ने आंकड़े पेश किए: हाउस नंबर 0 वाले हजारों वोटरों को साफ किया गया, जो डुप्लिकेट थे, न कि धांधली।
आयोग ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि SIR के दौरान 1 अगस्त से 15 अक्टूबर तक एक भी अपील क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के अंदर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन उसके बाद आरोप लगाना ‘झूठा प्रचार’ है। आयोग ने राहुल को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया: या तो हलफनामा देकर सबूत दें, या सार्वजनिक माफी मांगें। अन्यथा, सभी आरोप ‘झूठे’ माने जाएंगे। आयोग ने जोर दिया कि मतदाता सूची तैयार करना और वोट डालना दो अलग कानून हैं, और डुप्लिकेट नामों से दोहरी वोटिंग संभव नहीं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप:
भाजपा ने राहुल के दावों को ‘झूठा और आधारहीन’ बताया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह कांग्रेस की हार का बहाना है, और देश की लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश। राजनाथ सिंह ने बिहार में कहा कि सेना को राजनीति में घसीटना गलत है। विपक्ष ने आयोग को ‘पक्षपाती’ करार दिया—कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि सीईसी ने राहुल के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया, और सुप्रीम कोर्ट के 14 अगस्त 2025 के आदेशों का पालन हो। शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकुर ने समर्थन जताया।
यह विवाद 1 अगस्त 2025 से चल रहा है, जब राहुल ने 2024 लोकसभा चुनावों में धांधली का ‘एटम बम’ दावा किया। 7 अगस्त को कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में विसंगतियों का जिक्र किया। 13 अगस्त को बिहार के 7 वोटरों से मुलाकात की, जिनके नाम ‘मृत’ बताकर हटाए गए। भाजपा ने जवाबी आरोप लगाया कि रायबरेली, वायनाड आदि सीटों पर विपक्ष ने धांधली की।
बिहार चुनाव पर प्रभाव:
बिहार में प्रथम चरण का मतदान 6 नवंबर को है, और यह विवाद मतदाता विश्वास को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR ने 75 लाख प्रवासियों के नाम हटाने के आरोपों से विपक्ष को मुद्दा दिया, लेकिन आयोग का दावा है कि यह डुप्लिकेट हटाने से मतदाता सूची मजबूत हुई। कांग्रेस ने 11 अगस्त को 200 विधायकों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो सुप्रीम कोर्ट जा सकता है; अन्यथा, यह विपक्ष की रणनीति विफल हो सकती है।
यह घटना भारतीय चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस छेड़ रही है, जहां डिजिटल वोटर लिस्ट और फॉर्म्स के दुरुपयोग की आशंका है। राहुल का ‘वोटर अधिकारी यात्रा’ 20 जिलों में 1,300 किमी का सफर है, जो 17 अगस्त से शुरू हुआ। आयोग की चेतावनी है कि भ्रामक प्रचार से लोकतंत्र कमजोर होता है।
