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By: Yogendra Singh

Election : पश्चिम बंगाल की सियासत में कांग्रेस ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों में वह किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और राज्य की सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह फैसला नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यकारी समिति (CWC) की अहम बैठक में लिया गया, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ बंगाल के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।

Election CWC बैठक में हुआ अहम फैसला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई इस बैठक में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी, तथा राज्य से कांग्रेस की एकमात्र लोकसभा सांसद ईशा खान चौधरी मौजूद रहीं। राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल सहित कई बड़े नेता भी बैठक में शामिल हुए। लंबी चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि गठबंधन की राजनीति से पार्टी को नुकसान हुआ है, इसलिए इस बार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना बेहतर होगा।

Election गुलाम अहमद मीर का बयान और गठबंधन से दूरी

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव और बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने मीडिया को फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में गठबंधन और सीट-बंटवारे के पिछले अनुभव संतोषजनक नहीं रहे। इससे संगठनात्मक स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर पड़ा। मीर के अनुसार, जमीनी कार्यकर्ताओं और राज्य नेतृत्व से मिले फीडबैक के आधार पर यह तय किया गया कि कांग्रेस अपनी ताकत पर चुनाव लड़ेगी और किसी भी दल—चाहे वह वाम मोर्चा हो या तृणमूल कांग्रेस—के साथ समझौता नहीं करेगी।

अधीर रंजन चौधरी की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी, जो पहले वाम मोर्चे के साथ गठबंधन के समर्थक माने जाते थे, ने भी पार्टी के फैसले को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हाईकमान का निर्णय सर्वोपरि है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ इस रणनीति पर आगे बढ़ेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वाम मोर्चे और कांग्रेस के बीच पहले जो तालमेल था, वह अब कमजोर पड़ चुका है। दिवंगत सीताराम येचुरी के बाद वाम दलों में ऐसा प्रभावशाली नेतृत्व नहीं रहा जो इस गठबंधन को आगे बढ़ा सके।

कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अब फोकस संगठन को मजबूत करने, योग्य उम्मीदवारों के चयन और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर रहेगा। तृणमूल कांग्रेस की सत्ता और भाजपा की मजबूत मौजूदगी के बीच कांग्रेस का यह कदम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है और चुनावी मुकाबले को और रोचक बना सकता है।

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