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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश सरकार की डिजिटल पहल ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 सितंबर 2025 को हरदा जिले के खिरकिया में आयोजित एक भव्य समारोह में मात्र एक क्लिक के माध्यम से 489 करोड़ रुपये की राशि 20,652 निजी स्कूलों के खातों में हस्तांतरित कर दी। यह राशि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के 8.45 लाख से अधिक छात्रों की कक्षा 1 से 12 तक की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए है। यह कदम न केवल अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

यह पहल 2023-24 शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार की गई थी, जिसमें आरटीई के प्रावधानों के अनुसार निजी संस्थानों में नामांकित छात्रों की फीस का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश में आरटीई योजना के तहत 25 प्रतिशत सीटें ईडब्ल्यूएस, अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए आरक्षित हैं, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस वर्ष की यह राशि पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जो राज्य सरकार की शिक्षा बजट पर बढ़ते फोकस को दर्शाती है। समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, और हमारा लक्ष्य है कि कोई भी आर्थिक बाधा किसी मासूम के सपनों के बीच न आए। यह डिजिटल हस्तांतरण पारदर्शिता और त्वरित वितरण का प्रतीक है।”

खिरकिया कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधकों, अभिभावकों और छात्रों की भारी भीड़ उमड़ी थी। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरे राज्य के स्कूलों से जुड़कर फंड ट्रांसफर को लाइव दिखाया, जिससे लाभार्थियों को तत्काल राहत मिली। इस योजना से लाभान्वित होने वाले छात्र मुख्य रूप से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से हैं, जहां निजी स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के शिक्षा विभाग के अनुसार, यह राशि सीधे स्कूलों के बैंक खातों में जमा हो गई, जिससे कागजी कार्रवाई में देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची। अब तक की प्रगति से पता चलता है कि मध्य प्रदेश आरटीई कार्यान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो चुका है।

यह पहल न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि शिक्षा की पहुंच को मजबूत करने का माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए एक नई घोषणा भी की—आरटीई छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे अभिभावकों का खर्च और कम होगा और छात्रों का स्कूल बैग बोझिल न हो। शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि यह योजना राज्य के 52 जिलों में फैली हुई है, और अगले वर्ष इसे और विस्तार दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं ड्रॉपआउट दर को कम करने और साक्षरता स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मध्य प्रदेश सरकार की यह डिजिटल पहल ई-गवर्नेंस का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां आधार-लिंक्ड पेमेंट सिस्टम के जरिए फंड का वितरण सुनिश्चित किया गया। इससे भ्रष्टाचार की आशंका भी न्यूनतम हो गई है। अभिभावक संगठनों ने मुख्यमंत्री की सराहना की है, जबकि विपक्ष ने भी इसे सकारात्मक कदम बताया है। कुल मिलाकर, यह 489 करोड़ रुपये का हस्तांतरण शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के मानव संसाधन को मजबूत करेगा।

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