By: Ravindra Sikarwar
ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध बेटिंग ऐप्स के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश की जानी-मानी हस्तियों से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस कार्रवाई में पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह, फिल्म अभिनेता सोनू सूद, अभिनेत्री उर्वशी रौतेला समेत कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। ईडी का आरोप है कि इन हस्तियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अवैध बेटिंग ऐप्स के प्रचार और वित्तीय लेनदेन से संबंध रहा है।
ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स के जरिए भारी मात्रा में काला धन अर्जित किया गया, जिसे बाद में अलग-अलग माध्यमों से सफेद करने की कोशिश की गई। इन ऐप्स का नेटवर्क देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि प्रचार के लिए फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे आम लोगों, खासकर युवाओं को इन प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित किया जा सके।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, जिन हस्तियों की संपत्तियां कुर्क की गई हैं, उनमें बैंक खातों में जमा राशि, निवेश, लग्जरी वाहन और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े संदिग्ध लेनदेन से अर्जित आय से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, ईडी ने स्पष्ट किया है कि कुर्की की यह कार्रवाई जांच का हिस्सा है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाएगा।
बताया जा रहा है कि अवैध बेटिंग ऐप्स के संचालक बड़े पैमाने पर विज्ञापन और प्रमोशन पर खर्च कर रहे थे। इसके लिए लोकप्रिय चेहरों को मोटी रकम दी गई, ताकि उनकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता का फायदा उठाकर आम लोगों को भरोसे में लिया जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरह के प्रचार से लोगों को यह भ्रम हुआ कि ये ऐप्स वैध और सुरक्षित हैं, जबकि वास्तव में ये कानून के दायरे से बाहर थे।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि सट्टेबाजी से कमाए गए पैसों को शेल कंपनियों, फर्जी खातों और विदेशी लेनदेन के जरिए छिपाने की कोशिश की गई। कुछ मामलों में क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल के संकेत भी मिले हैं। इसी आधार पर एजेंसी ने मनी ट्रेल को ट्रैक करते हुए संबंधित लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
इस पूरे मामले पर संबंधित हस्तियों की ओर से फिलहाल अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ का कहना है कि वे केवल विज्ञापन या ब्रांड एंडोर्समेंट से जुड़े थे और उन्हें ऐप्स के अवैध होने की जानकारी नहीं थी। वहीं, कुछ ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने की बात कही है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह साबित हो जाता है कि किसी भी व्यक्ति ने जानबूझकर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया या उससे आर्थिक लाभ लिया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ईडी की इस कार्रवाई को ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सरकार पहले ही अवैध बेटिंग और जुए के खिलाफ सख्त रुख अपना चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से न केवल अवैध नेटवर्क पर लगाम लगेगी, बल्कि मशहूर हस्तियों को भी विज्ञापन और प्रमोशन से पहले कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से सोचने का संदेश जाएगा।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ कुछ नामचीन चेहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के उस बड़े तंत्र की ओर इशारा करता है, जो तकनीक और प्रचार के सहारे लोगों को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल रहा है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच और तेज होने की संभावना है, जिससे और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
