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by-Ravindra Sikarwar

चेन्नई: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश में 21 से अधिक बच्चों की मौत से जुड़े जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले की जांच में तेजी लाते हुए, सोमवार को चेन्नई और कांचीपुरम में सात स्थानों पर छापेमारी की। ये छापे श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (जिसे कभी-कभी श्रीसन फार्मा भी कहा जाता है) के मालिक और तमिलनाडु दवा नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों तथा कार्यालयों पर मारे गए। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच चल रही है, जिसमें दवा कंपनी द्वारा मिलावटी सिरप की बिक्री से प्राप्त मुनाफे को अपराध की आय माना जा रहा है। छापेमारी के दौरान कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए गए, जो निरीक्षण रिपोर्टों और ईमेल में संभावित अनियमितताओं की जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं।

घटना का विस्तृत विवरण:
ईडी की कई टीमों ने 13 अक्टूबर को सुबह से ही छापेमारी शुरू की, जो देर शाम तक चली। छापे चेन्नई के कोडंबक्कम इलाके में कंपनी मालिक जी रंगनाथन के आवास, कांचीपुरम जिले के सुंगुवरचतिरम में स्थित फैक्ट्री और गोदाम, साथ ही तमिलनाडु दवा नियंत्रण विभाग के कार्यकारी निदेशक पी यू कार्तिकेयन, निलंबित अधिकारी दीपा जोसेफ और के कार्तिकेयन के घरों पर मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि ये कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर और तमिलनाडु की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (डीवीएसी) द्वारा दर्ज एक अन्य एफआईआर पर आधारित है।

मामले की जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि अनुमत सीमा मात्र 0.1 प्रतिशत है। यह विषाक्त रसायन गुर्दे की विफलता का कारण बनता है, जिससे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया शहर में ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के 21 बच्चों की मौत हो गई। कुछ मौतें राजस्थान में भी दर्ज की गईं। सिरप की बोतलों को छिंदवाड़ा में सील कर दिया गया और कई राज्यों में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि:
श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स को 2011 में लाइसेंस मिला था, लेकिन कंपनी ने राष्ट्रीय दवा सुरक्षा नियमों का बार-बार उल्लंघन किया। जांच में पता चला कि फैक्ट्री में बुनियादी ढांचा खराब था, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) का पालन नहीं किया गया और कामकाजी स्थिति दयनीय थी। कंपनी ने अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ‘सुगम’ पोर्टल पर पंजीकृत नहीं कराया, जो दवा निर्माण की निगरानी के लिए अनिवार्य है। तमिलनाडु फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (टीएनएफडीए) ने केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को कंपनी के बारे में जानकारी नहीं दी, जिससे यह केंद्रीय डेटाबेस से गायब रही।

2021 और 2022 में कंपनी पर कई उल्लंघनों के लिए कार्रवाई हुई, लेकिन 2023 से कोई निरीक्षण नहीं किया गया। टीएनएफडीए अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर लाइसेंस दिए और निरीक्षण में लापरवाही बरती। जुलाई 2025 में पी यू कार्तिकेयन को डीवीएसी ने 25,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, जो एक साबुन निर्माता से लाइसेंस के बदले ली गई थी। दीपा जोसेफ और के कार्तिकेयन को पिछले दो वर्षों में निरीक्षण न करने के लिए निलंबित किया गया।

सीडीएससीओ ने 3 अक्टूबर को छिंदवाड़ा में संयुक्त जांच की, लेकिन टीएनएफडीए अधिकारी इसमें शामिल नहीं हुए। टीएनएफडीए ने शुरुआत में अक्टूबर में कंपनी का ऑडिट किया, लेकिन रिपोर्ट सीडीएससीओ से साझा नहीं की। लैब रिपोर्ट में विषाक्तता की पुष्टि के बाद तमिलनाडु सरकार ने दो शो-कॉज नोटिस जारी किए और कंपनी की मदद से मध्य प्रदेश पुलिस को मालिक की गिरफ्तारी में सहयोग किया।

शामिल पक्ष और अधिकारियों की कार्रवाई:

  • श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स: कंपनी मालिक जी रंगनाथन को 9 अक्टूबर को मध्य प्रदेश पुलिस की सात सदस्यीय टीम ने चेन्नई से गिरफ्तार किया। छिंदवाड़ा अदालत ने उन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा। रंगनाथन ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने वर्षों से सिरप बनाया है और कोई समस्या नहीं आई।
  • तमिलनाडु दवा नियंत्रण विभाग: निलंबित अधिकारियों दीपा जोसेफ और के कार्तिकेयन, साथ ही गिरफ्तार पी यू कार्तिकेयन शामिल। विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप।
  • अन्य एजेंसियां: मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों पर दो एफआईआर दर्ज कीं, डीवीएसी ने रिश्वत मामले में एफआईआर की। सीडीएससीओ ने लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की।

तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने 13 अक्टूबर को कंपनी के सभी लाइसेंस रद्द कर दिए और फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद कर दिया। राज्य सरकार ने सभी फार्मा कंपनियों का नया ऑडिट शुरू करने की घोषणा की ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो। ईडी ने पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज किया और जांच को भ्रष्टाचार तथा मुनाफे की जांच तक विस्तारित किया।

अधिकारियों के बयान:
ईडी के एक सूत्र ने कहा, “हम चेन्नई और कांचीपुरम में सात स्थानों पर छापेमारी कर रहे हैं। हम पीएमएलए के तहत मामले की जांच कर रहे हैं।”

एक अन्य सूत्र ने बताया, “ईडी श्रीसन फार्मा के प्रमुख कर्मचारियों और दवा नियंत्रण विभाग के कुछ अधिकारियों की तलाशी ले रही है, जिसमें कार्यकारी निदेशक भी शामिल हैं, जो रिश्वत लेते पकड़े गए थे। अपराध की आय और शामिल लोगों का पता लगाया जा रहा है।”

तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने बयान जारी कर कहा, “आज (13.10.2025) श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स को दिए गए सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और फैक्ट्री स्थायी रूप से बंद कर दी गई है।”

एक सूत्र ने जोड़ा, “मिलावटी कफ सिरप की बिक्री से प्राप्त मुनाफा अपराध की आय है। दवा अधिकारी जो नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे थे, उन्होंने सार्वजनिक कर्तव्य में विफलता दिखाई।”

प्रभाव और आगे की संभावनाएं:
यह मामला दवा नियामक प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर करता है, जिसमें राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच संवाद की कमी, भ्रष्टाचार और निगरानी की लापरवाही शामिल है। मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। जांच से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। ईडी की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर रंगनाथन से पूछताछ की जाएगी। राज्यव्यापी फार्मा ऑडिट से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है, लेकिन यह बच्चों की मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की मांग को मजबूत कर रहा है।

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