by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: खगोल वैज्ञानिकों ने हाल ही में पृथ्वी के एक नए ‘क्वासी-मून’ की खोज की है, जिसका नाम 2025 PN7 रखा गया है। यह एक छोटा सा क्षुद्रग्रह है जो सूर्य की परिक्रमा करता है, लेकिन पृथ्वी के दृष्टिकोण से ऐसा लगता है मानो यह हमारे ग्रह की परिक्रमा कर रहा हो। यह कोई वास्तविक चंद्रमा नहीं है, बल्कि एक अस्थायी साथी है जो पृथ्वी के साथ अपनी कक्षा साझा करता है। यह खोज 2 अगस्त 2025 को हवाई के हेलेकाला वेधशाला में स्थित पैन-स्टार्स 1 दूरबीन द्वारा की गई थी। पुरानी छवियों की जांच से पता चला कि यह क्षुद्रग्रह 2014 से ही अवलोकनों में मौजूद था, लेकिन इसकी छोटी आकार और मंद चमक के कारण अब तक ध्यान नहीं गया था।
क्वासी-मून क्या होता है? क्वासी-मून या अर्ध-उपग्रह वे वस्तुएं हैं जो किसी ग्रह के साथ सूर्य की परिक्रमा करती हैं, लेकिन ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से बंधी नहीं होतीं। पृथ्वी के परिप्रेक्ष्य से देखें तो ये वस्तुएं ग्रह के चारों ओर घूमती हुई प्रतीत होती हैं, लेकिन वास्तव में ये सूर्य की कक्षा में रहती हैं। इनकी गति और स्थिति ऐसी होती है कि ये कभी ग्रह के आगे तो कभी पीछे नजर आती हैं। उदाहरण के लिए, शुक्र ग्रह का क्वासी-मून 2002 VE68 (जिसे 524522 Zoozve भी कहा जाता है) इसी तरह का है। पृथ्वी के लिए 2025 PN7 एक नया साथी है, जो 1:1 औसत गति अनुनाद (रेजोनेंस) में पृथ्वी के साथ जुड़ा हुआ है। समय के साथ ये हॉर्सशू (घोड़े की नाल) कक्षा में बदल सकती हैं, जहां ये पृथ्वी के चारों ओर एक नाल जैसी आकृति बनाती हुई दिखती हैं।
2025 PN7 की भौतिक विशेषताएं: यह क्षुद्रग्रह लगभग 19 मीटर (62 फीट) व्यास का है, जो काफी छोटा है। इसकी निरपेक्ष परिमाण (एब्सोल्यूट मैग्निट्यूड) 26.4 है, जो इसे बेहद मंद बनाती है और सामान्य दूरबीनों से देखना असंभव है। इसकी सतह और संरचना के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन इसे एक चट्टानी प्राकृतिक वस्तु माना जा रहा है। मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी से कैद होने की संभावना है, हालांकि कुछ अन्य क्वासी-मून जैसे कामो’ओलेवा (Kamo‘oalewa) को चंद्रमा के टुकड़े के रूप में माना जाता है जो प्रभाव से निकला हो।
कक्षा संबंधी विवरण: 31 अगस्त 2025 की स्थिति के आधार पर, इसकी अधिकतम दूरी (एफेलियन) 1.108 AU, न्यूनतम दूरी (पेरिहेलियन) 0.898 AU, अर्ध-प्रमुख अक्ष 1.003 AU, विकेंद्रता 0.108, और झुकाव 1.98 डिग्री है। इसकी घूर्णन अवधि 1 वर्ष है। यह अपोलो क्षुद्रग्रह समूह और अर्जुना क्षुद्रग्रह वर्ग का सदस्य है, जिनकी कक्षाएं पृथ्वी से बहुत मिलती-जुलती हैं। पृथ्वी से इसकी निकटतम दूरी लगभग 299,000 किलोमीटर है, जबकि दूरतम दूरी करोड़ों किलोमीटर तक हो सकती है। गुरुत्वाकर्षणीय प्रभाव से यह कभी-कभी मिनी-मून बन सकती है, जहां यह अस्थायी रूप से पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण में कैद हो जाती है।
इसकी अवधि और इतिहास: विश्लेषण से पता चला है कि 2025 PN7 कम से कम 60 वर्षों से क्वासी-उपग्रह की स्थिति में है और यह लगभग 128 वर्षों तक इसी अवस्था में रहेगा, यानी 2083 तक। उसके बाद सूर्य का गुरुत्वाकर्षण इसे इस विन्यास से बाहर कर सकता है। भविष्य में पृथ्वी से निकट मुठभेड़ों से इसकी कक्षा में बदलाव हो सकता है, जो इसे मंगल या शुक्र की ओर ले जा सकता है।
अन्य क्वासी-मून से तुलना: पृथ्वी के अन्य ज्ञात क्वासी-उपग्रहों में कार्डिया (164207 Cardea), कामो’ओलेवा (469219 Kamoʻoalewa), 2006 FV35, 2013 LX28, 2014 OL339, और 2023 FW13 शामिल हैं। कामो’ओलेवा पर चीन ने 2025 में तियानवेन-2 मिशन लॉन्च किया है, जो 2027 तक नमूने लाकर वापस आएगा। 2025 PN7 इनमें सबसे नया है और इसका अध्ययन कक्षा अनुनादों तथा निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रहों की गतिशीलता को समझने में मदद करेगा।
इसकी महत्वपूर्णता: 2025 PN7 जैसे क्वासी-मून ग्रह रक्षा, क्षुद्रग्रह खनन और सौर मंडल के निर्माण के अध्ययन के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला प्रदान करते हैं। इसकी पृथ्वी के निकट स्थिर कक्षा इसे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक सुलभ लक्ष्य बनाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि और अधिक अवलोकन से इसकी सतह की विशेषताओं का पता लगाया जा सकेगा, जो सौर मंडल की रहस्यों को उजागर करने में सहायक होगा। यह खोज हमें याद दिलाती है कि हमारा ग्रह अकेला नहीं है और ब्रह्मांड में ऐसे कई अस्थायी साथी हो सकते हैं।
