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By: Ravindra Sikarwar

रायपुर शहर में ई-रिक्शा अब रोजमर्रा की यात्राओं का एक अहम साधन बन चुके हैं। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी किसी न किसी रूप में ई-रिक्शा पर निर्भर हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि शहर में ई-रिक्शा संचालन पूरी तरह अव्यवस्थित होता जा रहा है। न कोई फिक्स किराया, न मीटर सिस्टम और न ही निगरानी। नतीजा यह है कि चालक अपने हिसाब से किराया तय कर यात्रियों से मनमानी वसूली कर रहे हैं।

स्थिति यह है कि एक ही दूरी के लिए कोई 10 रुपए मांग रहा है, कोई 30, और कई चालक 150 से लेकर 300 रुपए तक भी वसूलने से नहीं हिचकते। खासकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किराए का कोई मानक नहीं रह गया है। इससे सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को होती है जो नियमित रूप से ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं।

किराया दूरी से नहीं, चेहरे और मजबूरी देखकर तय
यात्रियों के अनुसार ई-रिक्शा चालक दूरी की बजाय यात्रियों की स्थिति, समय या जरूरत देखकर किराया तय करते हैं।

  • ऑफिस जाने वाली महिलाओं से अधिक किराया
  • बाहरी जिलों/राज्यों से आए यात्रियों से दो से तीन गुना रेट
  • छात्रों से “चिल्लर नहीं है” कहकर अतिरिक्त वसूली
  • रात में नशे की हालत में रिक्शा चलाने वालों से बढ़ती परेशानी

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई बार 2–3 रिक्शा चालकों से पूछने पर भी कोई निश्चित किराया नहीं मिलता।

स्टेशन से सुंदर नगर तक 150 से 300 रुपए तक का अंतर
रेलगाड़ी से उतरने वाले यात्रियों के लिए तो हाल और भी खराब है। स्टेशन से बाहर निकलते ही चालक मनमाने किराए बोलने लगते हैं।

एक स्थानीय नागरिक मनोहर शर्मा ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ सुंदर नगर जाने के लिए ई-रिक्शा ढूंढ रहे थे।

  • एक चालक ने 300 रुपए मांगे
  • दूसरे ने 250 रुपए
  • तीसरे ने 150 रुपए

तीन अलग-अलग चालकों द्वारा तीन अलग-अलग किराए बताने से साफ है कि इस रूट पर कोई निर्धारित मानक मौजूद ही नहीं है।

शहर में अव्यवस्था की 4 बड़ी वजहें
शहर में ई-रिक्शा किराए की मनमानी के पीछे ये प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं—

  1. किराया तय करने का कोई सरकारी नियम या अधिसूचना नहीं
  2. कोई मीटर सिस्टम नहीं, पूरा किराया मौखिक बातचीत पर आधारित
  3. निगरानी या सख्त कार्रवाई करने वाला जिम्मेदार विभाग सक्रिय नहीं
  4. दूसरे शहरों से आए कई ई-रिक्शा चालक जिन्हें स्थानीय दरों और नियमों की जानकारी नहीं

इन सब कारणों ने मिलकर रिक्शा व्यवस्था को पूरी तरह असंगठित बना दिया है।

आमानाका में 15 मिनट में 5 अलग-अलग किराए
स्थानीय निवासी राकेश यादव ने बताया कि उन्होंने आमानाका से रिक्शा लेने का प्रयास किया। मात्र 15 मिनट में 4–5 रिक्शा मिले और हर चालक ने अलग-अलग रेट बताए—

  • किसी ने 20 रुपए
  • किसी ने 15
  • किसी ने 30
  • अंत में एक चालक 10 रुपए में तैयार हुआ

यह स्थिति दिखाती है कि शहर में किराए का कोई आधार ही नहीं बन पाया है।

छोटी दूरी पर भी मनमानी: 10–15 रुपए का सफर 30 में
कालीबाड़ी से घड़ी चौक तक की दूरी बहुत कम है, लेकिन प्रकाश वर्मा के अनुसार चालक 30 रुपए तक मांग रहे हैं। यह दूरी सामान्यतः 10–15 रुपए में तय हो जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान में यात्रियों को मजबूरी में अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

इसी तरह, पंडरी से लोधीपारा चौक तक जाने के लिए रानी साहू से 50 रुपए वसूले गए। उन्होंने बताया कि महंगाई के कारण रोज ई-रिक्शा से सफर करना मुश्किल होता जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रात में भाठागांव बस स्टैंड के आसपास कई चालक नशे में रिक्शा चलाते हैं, और अक्सर बचा हुआ पैसा वापस नहीं करते।

स्टेशन को “हाई-चार्ज जोन” मानते हैं चालक
रेलवे स्टेशन के आसपास बाहरी यात्रियों को देखकर कई चालक किराया दोगुना-तिगुना तक बोल देते हैं। स्थानीय लोग इसे “अनौपचारिक हाई-चार्ज जोन” बताते हैं, जहां यात्रियों को अक्सर मनमर्जी रकम चुकानी पड़ती है।

प्रशासनिक दखल की सख्त जरूरत**
रायपुर में ई-रिक्शा व्यवस्था का बेतरतीब ढंग से चलना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है।

  • किराया तय नहीं
  • मीटर व्यवस्था नहीं
  • चालक की इच्छा ही नियम

यदि प्रशासन जल्द किराया निर्धारण और निगरानी की व्यवस्था नहीं करता, तो यात्रियों की समस्या और बढ़ती जाएगी। शहरवासियों की मांग है कि सरकार तय किराया दरें जारी करे, मीटर सिस्टम लागू करे और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।

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