by-Ravindra Sikarwar
दलीप ट्रॉफी 2025 की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें 2023 के बाद पहली बार पारंपरिक ज़ोनल फॉर्मेट को वापस लाया गया है। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में छह टीमें खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को प्रभावित करने का एक महत्वपूर्ण रेड-बॉल मंच है। पूर्व खिलाड़ी और कोच भी इस पर करीब से नजर रखे हुए हैं। इस बार कुछ प्रमुख प्रदर्शन और अनुपस्थितियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
मुख्य बिंदु:
- ज़ोनल फॉर्मेट की वापसी: पिछले साल एक अलग फॉर्मेट के साथ प्रयोग के बाद, इस टूर्नामेंट में पारंपरिक ज़ोनल संरचना को वापस लाया गया है, जिससे क्षेत्रीय गौरव और प्रतिस्पर्धा में नई जान आ गई है।
- छह टीमें: इस टूर्नामेंट में छह टीमें भाग ले रही हैं: नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल और नॉर्थ-ईस्ट ज़ोन।
- खिलाड़ियों के लिए दांव पर बहुत कुछ: दलीप ट्रॉफी उभरते हुए युवा खिलाड़ियों और अनुभवी दोनों के लिए अपने कौशल का प्रदर्शन करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, ताकि वे भारत ए टीम और उससे भी बड़े सम्मान के लिए चयन प्राप्त कर सकें।
प्रमुख खिलाड़ियों से जुड़ी खबरें:
- मोहम्मद शमी की वापसी: अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी चोट के बाद अपनी टेस्ट करियर को फिर से शुरू करने के उद्देश्य से इस टूर्नामेंट में भाग ले रहे हैं। उनकी अनुशासित गेंदबाजी लगातार चर्चा का केंद्र रही है।
- शुभमन गिल की अनुपस्थिति: भारत के नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल, जिन्हें नॉर्थ ज़ोन का नेतृत्व करना था, बीमारी के कारण शुरुआती मैचों से बाहर हैं। उनकी जगह अंकित कुमार उप-कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं।
- अन्य प्रमुख खिलाड़ी: ध्रुव जुरेल सेंट्रल ज़ोन की कप्तानी कर रहे हैं, जबकि रजत पाटीदार भी अपने टेस्ट करियर को फिर से शुरू करने की कोशिश में लगे हैं। इसके अलावा, मनीषी जैसे युवा खिलाड़ियों ने भी अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया है।
चर्चा और टिप्पणियां:
- चयन का एक महत्वपूर्ण उपकरण: रिपोर्ट्स के अनुसार, दलीप ट्रॉफी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के इच्छुक खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण लिटमस टेस्ट के रूप में काम करती है।
- क्षेत्रीय गौरव: ज़ोनल फॉर्मेट की वापसी से खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच क्षेत्रीय गौरव बढ़ने की उम्मीद है, जैसा कि वेस्ट ज़ोन की ऐतिहासिक सफलताओं में देखा गया है।
- खिलाड़ियों का संघर्ष और महत्वाकांक्षाएं: हर्ष दुबे और यश राठौड़ जैसे खिलाड़ियों को अपनी टीमों में जगह बनाने और इस स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए उनके दृढ़ प्रयासों के लिए सराहा गया है, क्योंकि वे अपनी पिछली निराशाओं को प्रेरणा में बदल रहे हैं।
