By: Ravindra Sikarwar
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देने के लिए एक अहम और दूरगामी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इस योजना के तहत पहले चरण में 11,350 ग्राम पंचायतों को चुना गया है, जहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त डिजिटल लाइब्रेरी शुरू की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि गांवों के छात्र-छात्राएं अब उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों पर निर्भर न रहें।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को सिविल सेवा, बैंकिंग, पुलिस, शिक्षक भर्ती सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिलेगा। डिजिटल लाइब्रेरी में उपलब्ध संसाधन न केवल पढ़ाई को आसान बनाएंगे, बल्कि युवाओं को तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में भी मदद करेंगे। सरकार का मानना है कि शिक्षा तक आसान पहुंच से गांवों में प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी पर लगभग 4 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से करीब 2 लाख रुपये उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकों की व्यवस्था पर खर्च होंगे, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी किताबें शामिल होंगी। इसके अलावा लगभग 1.30 लाख रुपये आईटी उपकरणों जैसे कंप्यूटर, टैबलेट, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य डिजिटल संसाधनों पर व्यय किए जाएंगे। वहीं, करीब 70 हजार रुपये आधुनिक और सुविधाजनक फर्नीचर पर खर्च किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।
इन डिजिटल लाइब्रेरी में पारंपरिक पुस्तकों के साथ-साथ ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट, ऑनलाइन क्विज और लगभग 20 हजार डिजिटल शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर सकेंगे और नए-नए डिजिटल माध्यमों से सीखने का अनुभव प्राप्त करेंगे। खास बात यह है कि यह सामग्री विभिन्न स्तरों और विषयों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है, जिससे हर वर्ग के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह योजना पूरे प्रदेश में चरणबद्ध ढंग से लागू की जाएगी। डिजिटल लाइब्रेरी का प्रबंधन ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की देखरेख में किया जाएगा, जबकि संबंधित विभागों के सहायक अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाइब्रेरी का सही ढंग से संचालन हो और संसाधनों का दुरुपयोग न हो।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 35 जिलों में पुस्तकों का चयन पूरा कर लिया गया है। राजधानी लखनऊ सहित इन जिलों की कई ग्राम पंचायतों में जल्द ही डिजिटल लाइब्रेरी शुरू होने जा रही हैं। जिन जिलों में यह योजना लागू की जा रही है, उनमें अमरोहा, आजमगढ़, बांदा, बलिया, बागपत, बदायूं, बरेली, बिजनौर, चित्रकूट, एटा, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गाजीपुर, हरदोई, हापुड़, जालौन, कानपुर देहात, कन्नौज, कौशाम्बी, कासगंज, लखनऊ, मऊ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, सम्भल, शामली और सिद्धार्थनगर जैसे जिले शामिल हैं।
यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त किया जाएगा, जिससे वे बदलते समय की मांगों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रयोग न केवल ज्ञान का विस्तार करेगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देगा। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह योजना ग्रामीण उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगी।
