By: Ravindra Sikarwar
भारत में वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। यह न केवल देश की अब तक की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि स्वतंत्रता के बाद आयोजित होने वाली आठवीं जनगणना भी होगी। खास बात यह है कि पहली बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में स्वीकृति मिली।
कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनगणना 2027 से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होगा, जिसमें देश की पूरी आबादी से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। सरकार के अनुमान के अनुसार, एक व्यक्ति की जनगणना पर औसतन करीब 97 रुपये का खर्च आएगा।
दो चरणों में होगी जनगणना प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन – HLO) की जाएगी। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। इसमें देशभर के घरों, भवनों और आवासीय सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।
दूसरे चरण में वास्तविक जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन – PE) की जाएगी। मैदानी इलाकों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 से शुरू होगी, जबकि बर्फ से ढके क्षेत्रों में इसे पहले ही सितंबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। जनगणना की संदर्भ तिथि मैदानी क्षेत्रों के लिए 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे तय की गई है, वहीं हिमाच्छादित इलाकों के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।
मोबाइल ऐप से होगी डेटा एंट्री
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह डिजिटल स्वरूप है। इसके लिए एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसमें प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मेन्यू और उत्तर विकल्प मौजूद होंगे। गणनाकर्मी इसी ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। दर्ज किया गया डेटा सीधे बैक-एंड सिस्टम में जाएगा, जिससे मैनुअल डेटा एंट्री और कंपाइलेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस ऐप में इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन (ICR) तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। यह तकनीक हाथ से लिखे गए या अधूरे शब्दों और वाक्यों को भी पढ़ने में सक्षम होगी, जिससे डेटा की गुणवत्ता और सटीकता बढ़ेगी।
कानूनी ढांचे के तहत होगी प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जनगणना 2027, जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के अनुसार आयोजित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। नियमानुसार हर 10 साल में होने वाली जनगणना 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। अब लंबे अंतराल के बाद सरकार ने इसे दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 16 जून 2025 को जनगणना 2027 की राजपत्र अधिसूचना जारी की जा चुकी थी।
कैबिनेट के अन्य अहम फैसले
जनगणना के अलावा, कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को भी मंजूरी दी। इसमें कोयला लिंकेज नीति में सुधार के लिए कोलसेटू नीति को स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने खोपरा (सूखा नारियल) के लिए वर्ष 2025 के सीजन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी मंजूरी दी है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।
कैबिनेट बैठक से पहले यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि मनरेगा योजना के नाम में बदलाव किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इसे ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ नाम देने पर विचार किया गया था। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कुल मिलाकर, डिजिटल जनगणना 2027 न केवल तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि नीति निर्माण, विकास योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
