by-Ravindra Sikarwar
लाल किले के पास हाल ही में हुए बम धमाके ने जिस नए तरह के आतंकवाद को जन्म दिया है — जिसे खुफिया एजेंसियां “व्हाइट कॉलर टेररिज्म” कह रही हैं — उसके ठीक बीच छत्तीसगढ़ को देश के सबसे महत्वपूर्ण पुलिस सम्मेलन की मेजबानी मिली है।
28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर के आईआईएम कैंपस में होने वाले इस राष्ट्रीय डीजीपी-आईजी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे समय मौजूद रहेंगे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, दोनों गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय व बंदी संजय कुमार, सीबीआई डायरेक्टर, एनआईए चीफ, आईबी प्रमुख और सभी राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों के डीजीपीजी हिस्सा लेंगे।
यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ को इस सम्मेलन की मेजबानी मिली है। डीजीपी अरुणदेव गौतम ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के बाद इस सम्मेलन को दिल्ली के बंद कमरों से निकालकर राज्यों में ले जाने का फैसला किया था। पहले सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति होती थी, अब प्रधानमंत्री तीन दिन तक हर सत्र में रहते हैं, हर सुझाव को ध्यान से सुनते हैं और खुली चर्चा को प्रोत्साहित करते हैं।
यही वजह है कि इस बार की तैयारी युद्धस्तर पर हो रही है।
प्रधानमंत्री 28 नवंबर की शाम रायपुर पहुंचेंगे और नवा रायपुर में ही रुकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के नवनिर्मित बंगले को पूरी तरह अस्थायी पीएमओ में तब्दील कर दिया गया है। बंगले में किसी का भी आना-जाना पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी वीवीआईपी नए सर्किट हाउस के सूट रूम में ठहरेंगे। नवा रायपुर के तीनों सर्किट हाउस के 6 सूट और 22 कमरे बुक हैं। ठाकुर प्यारेलाल संस्थान में 140 कमरे, निमोरा अकादमी में 91 कमरे और रायपुर का पाहुना हाउस भी पांच दिनों के लिए पूरी तरह रिजर्व कर लिया गया है। कुल करीब 500 अधिकारियों-कर्मियों के ठहरने का इंतजाम है।
इस बार सम्मेलन में जिन प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा होगी उनमें शामिल हैं:
- आंतरिक सुरक्षा की मौजूदा स्थिति
- व्हाइट कॉलर टेररिज्म सहित आतंकवाद के नए मॉड्यूल
- नक्सलवाद का बचा-खुचा हिस्सा
- साइबर क्राइम और साइबर सिक्योरिटी
- ड्रग्स तस्करी और नार्को-टेररिज्म
- जेल सुधार और जेलों में गैंगवार
- पुलिस में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
पिछले आयोजनों की सूची:
- 2014: गुवाहाटी
- 2015: कच्छ का रण (गुजरात)
- 2016: हैदराबाद
- 2017: टेकनपुर (मध्य प्रदेश)
- 2018: केवडिया (गुजरात)
- 2019: पुणे
- 2021: लखनऊ
- 2023: दिल्ली (राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर)
- 2024: जयपुर
- 2024 (दिसंबर): भुवनेश्वर
- 2025: नवा रायपुर (छत्तीसगढ़)
एक तरह से देखें तो यह सम्मेलन अब सिर्फ पुलिस प्रमुखों की बैठक नहीं रहा। यह देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे ऊंची रणनीतिक मंथन-सभा बन चुका है — जहां प्रधानमंत्री खुद तीन दिन तक बैठकर हर राज्य के अनुभव को सुनते हैं और अगले एक साल की सुरक्षा नीति की दिशा तय करते हैं।
नवा रायपुर इस बार उस इतिहास का गवाह बनेगा।
