Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण ठंड और घने कोहरे का सीधा असर भारतीय रेलवे के संचालन पर दिखाई देने लगा है। कोहरे की वजह से रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई सुपरफास्ट व प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनें भी निर्धारित समय से घंटों देरी से अपने गंतव्य पर पहुंचीं। राजधानी भोपाल से गुजरने वाली वंदे भारत, शताब्दी एक्सप्रेस, पंजाब मेल सहित करीब तीन दर्जन ट्रेनें एक से चार घंटे तक लेट रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सोमवार सुबह घना कोहरा छाने के कारण रेलवे को ट्रेनों की गति नियंत्रित करनी पड़ी। दृश्यता कम होने से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई मार्गों पर ट्रेनों का संचालन सामान्य स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली के बजाय ब्लॉक पद्धति से किया गया। इस प्रणाली में एक समय में एक ही ट्रेन को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को टाला जा सके। हालांकि, इस व्यवस्था के चलते ट्रेनों की आवाजाही धीमी हो गई और देरी बढ़ती चली गई।

भोपाल रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 180 जोड़ी ट्रेनें गुजरती हैं और रोजाना करीब 25 हजार यात्री यहां से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रेनों की देरी का असर बड़ी संख्या में यात्रियों पर पड़ा। सोमवार को सुबह के समय कई यात्री प्लेटफॉर्म पर घंटों इंतजार करते नजर आए। कुछ यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूट गईं, तो कुछ को अपने गंतव्य पर पहुंचने में तय समय से कहीं अधिक वक्त लग गया।

रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस करीब तीन घंटे की देरी से पहुंची, जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस लगभग एक घंटे विलंब से आई। कर्नाटक एक्सप्रेस दो घंटे, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस तीन घंटे और पंजाब मेल भी करीब तीन घंटे देरी से अपने निर्धारित स्टेशन पर पहुंची। इसके अलावा भी कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार पर कोहरे का असर पड़ा।

ट्रेनों के लेट होने से परेशान यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराईं। सबसे ज्यादा शिकायतें ट्रेनों की देरी, सीटों की उपलब्धता और समय पर सही जानकारी न मिलने को लेकर सामने आईं। यात्रियों का कहना था कि जिन ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी में रखा गया है, वे भी पैसेंजर ट्रेन की तरह धीमी गति से चलती नजर आईं। कई यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रेनों को ऐसे स्टेशनों के पास रोक दिया गया, जहां सामान्य परिस्थितियों में ठहराव नहीं होता।

यात्रियों का कहना है कि जैसे ही सर्दी के मौसम में कोहरा शुरू होता है, रेलवे की तैयारियां नाकाफी साबित होने लगती हैं। अत्याधुनिक तकनीक और डिवाइस सिस्टम होने के बावजूद कोहरे के दौरान ट्रेन संचालन में बार-बार दिक्कतें सामने आती हैं। कुछ यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब हर साल ठंड के मौसम में यही स्थिति बनती है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जाता।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और कोहरे के समय गति सीमित करना जरूरी हो जाता है। कम दृश्यता में तेज रफ्तार से ट्रेन चलाना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए एहतियातन ट्रेनों को धीमी गति से चलाया जाता है। साथ ही ब्लॉक पद्धति अपनाने से दुर्घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।

हालांकि, यात्रियों का मानना है कि सुरक्षा के साथ-साथ समय प्रबंधन और सूचना तंत्र को भी बेहतर बनाने की जरूरत है। यदि यात्रियों को पहले से सटीक जानकारी मिल जाए तो वे अपनी यात्रा की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं।

फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में रेलवे यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर प्राप्त करें और अतिरिक्त समय लेकर सफर की योजना बनाएं। कोहरे का यह दौर फिलहाल रेलवे और यात्रियों—दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp