Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: दीवाली के उत्साह के बाद दिल्ली-एनसीआर में हवा एक बार फिर जहर बन गई। 21 अक्टूबर 2025 को सुबह होते ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ श्रेणी (301-400) में पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा दर्शाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 312 दर्ज किया गया, जबकि कुछ इलाकों जैसे आनंद विहार (378), रोहिणी (365) और मयूर विहार (352) में यह 350 से ऊपर रहा। पटाखों के धुएं, पराली जलाने और वाहनों की वजह से हवा में PM2.5 कणों की मात्रा सामान्य से 10 गुना अधिक हो गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति अगले 72 घंटों तक बनी रह सकती है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और हृदय रोगों का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली सरकार ने स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने और निर्माण कार्य रोकने के आदेश जारी किए हैं।

प्रदूषण की तीव्रता और AQI का विश्लेषण:
दीवाली की रात (20 अक्टूबर) में पटाखों की बौछार ने हवा को जहरीला बना दिया। CPCB के रीयल-टाइम डेटा के मुताबिक, 21 अक्टूबर सुबह 8 बजे दिल्ली का समग्र AQI 312 था, जो दोपहर तक 340 तक पहुंच गया। प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों पर स्थिति इस प्रकार थी:

स्टेशनAQI (सुबह 8 बजे)PM2.5 (μg/m³)PM10 (μg/m³)
आनंद विहार    378             285         412        
रोहिणी        365268398
मयूर विहार    352245376
आईटीओ         298210325
चांदनी चौक    315232348
द्वारका        289198310

PM2.5 कण (जो फेफड़ों में गहराई तक जाते हैं) की सांद्रता 200 μg/m³ से अधिक रही, जो WHO के सुरक्षित मानक (25 μg/m³) से 8 गुना ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले बैरियम, स्ट्रॉन्शियम और पोटैशियम जैसे तत्व हवा को विषैला बनाते हैं। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से आने वाली पराली की धुआं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

पटाखों का योगदान और दीवाली का प्रभाव:
इस साल दिल्ली सरकार ने ग्रीन पटाखों पर जोर दिया था, लेकिन फिर भी अवैध पटाखों की बिक्री और उपयोग ने प्रदूषण को बढ़ावा दिया। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दीवाली रात में AQI 250 से 350 के बीच रहा, जो अगली सुबह 50% बढ़ गया। SAFAR सिस्टम ने अनुमान लगाया कि पटाखों ने कुल प्रदूषण में 40% का योगदान दिया। पिछले वर्षों की तुलना में यह आउटेज 15% अधिक तीव्र है, क्योंकि हवा की गति कम होने से धुआं फंस गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर मौसम साफ न हुआ तो AQI 400 (गंभीर) तक पहुंच सकता है।

स्वास्थ्य पर खतरे और विशेषज्ञ सलाह:
वायु प्रदूषण से दिल्ली में सांस की बीमारियां 30% बढ़ गई हैं। डॉक्टरों के अनुसार, PM2.5 से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट अटैक और कैंसर का जोखिम बढ़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह सबसे खतरनाक है। लंग केयर फाउंडेशन के डॉ. अरविंद कुमार ने कहा, “बाहर रहने से बचें, मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरीफायर चलाएं।” अस्पतालों में 20% अधिक मरीज आ रहे हैं, खासकर आंखों और गले की समस्याओं के। सरकार ने GRAP स्टेज-1 लागू किया है, जिसमें निर्माण रोकना, 50% सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम और डीजल वाहनों पर पाबंदी शामिल है।

सरकारी कदम और प्रतिबंध:
दिल्ली सरकार ने तत्काल प्रभाव से:

  • सभी स्कूलों में 23 अक्टूबर तक ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं।
  • निर्माण और धूल पैदा करने वाले काम 72 घंटे के लिए रोके।
  • 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध लगाया।
  • मेट्रो और बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा बढ़ाई।

पर्यावरण मंत्री ने कहा, “हम पटाखों पर सख्ती करेंगे और पराली जलाने वालों पर जुर्माना लगाएंगे।” पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और यूपी ने भी पराली जलाने पर 50,000 रुपये का जुर्माना घोषित किया।

ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना:
पिछले 5 वर्षों में दीवाली के बाद दिल्ली का AQI इस प्रकार रहा:

  • 2024: 285 (खराब)
  • 2023: 320 (बहुत खराब)
  • 2022: 380 (गंभीर)
  • 2021: 450 (गंभीर+)
  • 2020: 410 (गंभीर)

इस साल की स्थिति 2023 जैसी है, लेकिन ग्रीन पटाखों से थोड़ी राहत मिली। CPCB चेयरमैन ने कहा कि लंबे समय तक प्रदूषण से 1.5 लाख मौतें हो सकती हैं।

नागरिकों के लिए सुझाव और जागरूकता:

  • घर पर रहें: बाहर निकलने से बचें, खासकर सुबह-शाम।
  • मास्क: N95 मास्क पहनें।
  • आहार: विटामिन C युक्त फल खाएं, भाप लें।
  • वाहन: कारपूलिंग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें।
  • घर: खिड़कियां बंद रखें, प्यूरीफायर चलाएं।

एनजीओ ने ‘ब्रीथ फ्री दिल्ली’ कैंपेन शुरू किया, जिसमें 10 लाख मास्क वितरित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर #CleanAirDilli ट्रेंड कर रहा है।

आगे की चुनौतियां और समाधान:
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम बदलने पर (25 अक्टूबर के बाद) हवा साफ हो सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए पराली प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित पटाखों को बढ़ावा जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि 2026 तक AQI 150 से नीचे लाया जाए। यह संकट दिल्ली को ‘गैस चैंबर’ बनाने से रोकने का समय है।

दीवाली की खुशियां जहरीली हवा में कहीं न खो जाएं—सभी नागरिक सतर्क रहें और पर्यावरण की रक्षा करें।