By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट कोलंबस स्कूल में 10वीं कक्षा के एक छात्र की आत्महत्या के बाद मामला गंभीर रूप से बढ़ गया है। स्कूल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार शिक्षकों—क्लास 4–10 की हेडमिस्ट्रेस, क्लास 9-10 के कोऑर्डिनेटर और दो अन्य शिक्षकों—को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इन चारों के खिलाफ पुलिस में FIR भी दर्ज की गई है। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया था कि उसे शिक्षकों द्वारा लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, और इसी प्रताड़ना के चलते उसने यह चरम कदम उठाया। परिवार के विरोध और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए दिल्ली शिक्षा विभाग ने मामले की गहन छानबीन के लिए एक पाँच सदस्यीय जांच कमेटी नियुक्त की है, जिसे तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह कमेटी घटना से संबंधित सभी परिस्थितियों, तथ्यों, स्कूल प्रशासन की भूमिका और जवाबदेही की जांच करेगी।
जांच कमेटी की संरचना और शिक्षा विभाग का रुख
शिक्षा विभाग द्वारा गठित इस कमेटी में वरिष्ठ अधिकारी और विद्यालय प्रशासन से जुड़े अनुभवी लोग शामिल हैं। इसमें संयुक्त निदेशक हर्षित जैन को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि DDE अनिल कुमार और पूनम यादव सदस्य होंगे। इनके अलावा दो स्कूल प्रिंसिपल—कपिल कुमार गुप्ता और सरिता देवी—को भी कमेटी में शामिल किया गया है। कमेटी का मुख्य कार्य यह पता लगाना है कि छात्र की शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने किस तरह संभाला और क्या उसकी मानसिक स्थिति से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया गया था या नहीं। शिक्षा विभाग ने कहा है कि यह सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
हालांकि, पीड़ित छात्र के पिता प्रदीप पाटिल ने निलंबन को अपर्याप्त करार दिया है। उनका कहना है कि जब तक आरोपित शिक्षक गिरफ्तार नहीं किए जाते, न्याय अधूरा रहेगा। उन्होंने दोहराया कि FIR में जिन शिक्षकों के नाम शामिल हैं, उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए, जिससे एक स्पष्ट संदेश जाए कि किसी भी बच्चे के साथ मानसिक क्रूरता या अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिवार का यह भी आरोप है कि उन्होंने कई बार स्कूल प्रशासन को छात्र की खराब मानसिक स्थिति के बारे में बताया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्या है पूरा मामला: छात्र के आखिरी नोट में क्या लिखा मिला?
19 नवंबर को 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने एक मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में उसके बैग से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने परिवार से बार-बार माफी मांगी और बताया कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव झेल रहा था। उसने आरोप लगाया कि स्कूल के कुछ शिक्षक उसके साथ कठोर व्यवहार करते थे और उसे बार-बार अपमानित करते थे। छात्र के परिवार के अनुसार, कुछ दिनों पहले ड्रामेटिक्स क्लास के दौरान वह गिर गया था, लेकिन उसकी हालत पूछने के बजाय शिक्षक ने उसका मज़ाक उड़ाया और कहा कि वह ‘ओवरएक्टिंग’ कर रहा है। परिवार ने शिकायत में यह भी लिखा है कि शिक्षक ने उससे यह तक कह दिया कि “तुम कितना भी रो लो, हमें फर्क नहीं पड़ेगा।”
पुलिस को दिए बयान में परिवार ने दावा किया कि इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियाँ और कठोर व्यवहार नियमित रूप से किया जाता था, जिससे छात्र बेहद टूट चुका था। उसके सहपाठियों से भी इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। घटना के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल के बाहर इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि स्कूलों को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए और काउंसलिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि बच्चे मानसिक दबाव का सामना करते समय अकेले न पड़ जाएँ।
पुलिस जांच जारी, अभिभावकों की मांग—जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो
राजेंद्र नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धाराएँ शामिल की गई हैं। पुलिस ने शिक्षकों, सहपाठियों और स्कूल प्रशासन के अन्य सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में हर तथ्य की जांच की जाएगी—चाहे वह शिक्षकों का व्यवहार हो, छात्र पर पड़ा मानसिक प्रभाव हो या स्कूल द्वारा की गई कार्रवाई की कमी।
उधर, मृतक छात्र के माता-पिता लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कानून के तहत कठोर सजा दी जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ उनके बेटे का मामला नहीं, बल्कि हर उस बच्चे की सुरक्षा का सवाल है जो विद्यालय में पढ़ने जाता है। इस घटना ने स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षकों के व्यवहार और छात्रों के साथ संवेदनशीलता से पेश आने को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।
