Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण का कहर मचा हुआ है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे शहरवासियों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है। बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड एयर प्यूरीफायर की कीमतें 10,000 से 40,000 रुपये तक होने के कारण कई लोग इन्हें खरीदने से कतरा रहे हैं। ऐसे में एक दिल्ली के निवासी ने सस्ते और सरल सामान से घर पर ही एक DIY (स्वयं बनाएं) एयर प्यूरीफायर तैयार किया, जो मात्र 1900 रुपये में बना और 15 मिनट के अंदर कमरे के AQI को 380-400 से घटाकर 50 से नीचे ले आया। यह खबर रेडिट पर वायरल हो गई है, जहां हजारों लोगों ने इसे सराहा और खुद बनाने की योजना बनाई।

यह नवाचार एक रेडिट यूजर ‘shukrant25’ ने साझा किया, जिन्होंने r/delhi सबरेडिट पर “I Built my Personal Air Purifier for 2000 INR” नामक पोस्ट अपलोड की। पोस्ट में उन्होंने बताया कि उन्होंने एक साधारण एग्जॉस्ट फैन और HEPA फिल्टर का उपयोग करके यह डिवाइस बनाई, जो उनके मौजूदा फिलिप्स ब्रांडेड प्यूरीफायर से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने पोस्ट में चित्र और वीडियो भी शेयर किए, जिसमें डिवाइस का निर्माण प्रक्रिया और उसके परिणाम दिखाए गए। पोस्ट को अब तक 1,500 से अधिक वोट और 370 कमेंट्स मिल चुके हैं, जो दर्शाता है कि दिल्लीवासी इस समस्या से कितने परेशान हैं।

निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और लागत:
इस DIY प्यूरीफायर को बनाने के लिए यूजर ने आसानी से उपलब्ध सस्ते सामान का इस्तेमाल किया। कुल लागत लगभग 1965 रुपये आई, जो बाजार के महंगे डिवाइसों से कहीं कम है। यहां सामग्री की सूची दी गई है:

सामग्रीलागत (रुपये में)विवरण
150mm एग्जॉस्ट फैन Rs. 750 हवा को फिल्टर से गुजारने के लिए मुख्य हिस्सा, जो मजबूती से काम करता है।
HEPA फिल्टर (अमेज़न से)Rs. 1000महीन कणों, धूल और प्रदूषकों को रोकने वाला उच्च गुणवत्ता वाला फिल्टर।
स्विच, रेगुलेटर, तारRs. 65स्पीड कंट्रोल और बिजली कनेक्शन के लिए बेसिक इलेक्ट्रिकल पार्ट्स।
कार्डबोर्ड और ग्लू गनRs. 150बॉक्स बनाने और सामान को जोड़ने के लिए, जो सस्ता और आसानी से उपलब्ध है।
कुलRs. 1965

निर्माण प्रक्रिया सरल है: सबसे पहले कार्डबोर्ड से एक बॉक्स बनाएं, जिसमें एग्जॉस्ट फैन एक तरफ लगाएं और HEPA फिल्टर को दूसरी तरफ फिट करें। फैन हवा को अंदर खींचेगा, फिल्टर से गुजरेगा और साफ हवा बाहर निकलेगी। यूजर ने बॉक्स पर मजाक में “फिलिप्स” लिखा, ताकि यह दिखे कि यह ब्रांडेड मॉडल से बेहतर है। कोई जटिल टूल्स की जरूरत नहीं—बस ग्लू गन और बेसिक स्क्रूड्राइवर से काम चल जाता है।

प्रदर्शन: 15 मिनट में चमत्कारिक बदलाव
यूजर ने दावा किया कि यह डिवाइस 12 फीट x 12 फीट के कमरे में न्यूनतम फैन स्पीड पर चलने पर भी कमाल कर देता है। परीक्षण के दौरान, कमरे का AQI 380-400 के आसपास था (जो ‘गंभीर’ स्तर है, जहां सांस लेना खतरनाक होता है)। प्यूरीफायर चालू करने के बाद मात्र 15 मिनट में AQI 50 से नीचे आ गया, जो ‘अच्छा’ श्रेणी में है। AQI मापने के लिए उन्होंने अपने पुराने फिलिप्स प्यूरीफायर के सेंसर का उपयोग किया। यह प्रदर्शन इसलिए प्रभावशाली है क्योंकि दिल्ली का मौजूदा AQI 300-400 के बीच घूम रहा है, जहां PM2.5 और PM10 कणों की मात्रा जानलेवा स्तर पर है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज डेटा के अनुसार, 2023 में दिल्ली में वायु प्रदूषण से 15% मौतें हुईं, जो शहर का सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम है।

इंटरनेट पर धूम: सराहना और सुझावों की बौछार
रेडिट पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तहलका मच गया। यूजर्स ने इसे “सरल लेकिन प्रभावी” बताते हुए खूब प्रशंसा की। कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं:

  • एक यूजर ने कहा, “भाई, वीकेंड पर वर्कशॉप आयोजित करो। मैं सारे सामान लेकर आऊंगा, तुम्हें बनाने में मदद कर दूंगा।”
  • दूसरे ने लिखा, “यह शानदार DIY है। ऐसे लोगों की जरूरत है जो ऐसी समस्याओं का हल निकालें। कudos!”
  • तीसरे ने सुझाव दिया, “फिल्टर और फैन के लिंक शेयर करो। मुझे AQI सेंसर नहीं है, लेकिन मैं ट्राई करूंगा।”
  • कई ने कहा कि यह ब्रांडेड कंपनियों को सस्ते विकल्प बनाने के लिए मजबूर करेगा। एक यूजर ने ट्यूटोरियल वीडियो बनाने की मांग की।

कई लोगों ने खुद इसे बनाने की योजना बनाई और कहा कि वे सेंसर जोड़कर और बेहतर बनाएंगे। हालांकि, कुछ ने सलाह दी कि HEPA फिल्टर को नियमित बदलें, क्योंकि यह प्रदूषण के साथ जल्दी गंदा हो सकता है।

प्रदूषण से लड़ने का सशक्त हथियार:
यह DIY प्यूरीफायर न केवल लागत प्रभावी है, बल्कि यह दर्शाता है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान घरेलू स्तर पर भी संभव है। दिल्ली में GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू होने के बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा, इसलिए ऐसे नवाचार महत्वपूर्ण हैं। यूजर ने ट्यूटोरियल शेयर करने का वादा किया है, ताकि और लोग इसे अपना सकें। यदि आप भी ट्राई करना चाहें, तो सावधानी बरतें और बिजली कनेक्शन सही करें। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं, खासकर जब सरकारें प्रदूषण पर पूर्ण नियंत्रण न पा सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *