Delhi : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजधानी में सक्रिय एक बड़े ‘बुक माफिया’ नेटवर्क पर प्रहार करते हुए नकली (पाइरेटेड) एनसीईआरटी (NCERT) किताबों के एक विशाल भंडार को जब्त किया है। शाहबाद दौलतपुर गांव स्थित एक गोदाम में की गई इस छापेमारी में पुलिस ने कक्षा 1 से 12 तक की 5011 नकली किताबें बरामद की हैं। इस मामले में पुलिस ने गोदाम के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने के बाद इस अवैध धंधे का मास्टरमाइंड बन बैठा था।

गुप्त सूचना पर क्राइम ब्रांच की सर्जिकल स्ट्राइक
Delhi पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC टीम) को 12 मार्च को एक विश्वसनीय सूचना मिली थी कि शाहबाद दौलतपुर इलाके में एक निजी गोदाम से भारी मात्रा में नकली एनसीईआरटी किताबों की सप्लाई की जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने जाल बिछाया और गोदाम पर छापा मारा।
कार्रवाई के दौरान मौके पर एनसीईआरटी के विशेषज्ञों को बुलाया गया, जिन्होंने कागजों की गुणवत्ता और प्रिंटिंग की बारीकी से जांच करने के बाद पुष्टि की कि बरामद की गई सभी 5011 किताबें पाइरेटेड हैं। पुलिस ने मौके से अरविंद कुमार नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे गोदाम का संचालन कर रहा था। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), कॉपीराइट एक्ट और ट्रेडमार्क एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (संख्या 47/26) दर्ज की गई है।
आरोपी का प्रोफाइल: प्रतियोगी छात्र से ‘बुक माफिया’ बनने तक का सफर
Delhi पुलिस पूछताछ में आरोपी अरविंद कुमार के बारे में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मूल रूप से बिहार का रहने वाला अरविंद साल 2003 में अपने सपनों को पूरा करने दिल्ली आया था। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से स्नातक और इग्नू (IGNOU) से एमए की डिग्री हासिल की।

बताया जा रहा है कि अरविंद कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उसने शॉर्टकट रास्ता अपनाया। साल 2022 में उसने अधिक मुनाफा कमाने के लालच में नकली एनसीईआरटी किताबों का अवैध कारोबार शुरू कर दिया। विडंबना यह है कि जिस शिक्षा के जरिए वह कभी अधिकारी बनना चाहता था, उसी शिक्षा की सामग्री को उसने धोखाधड़ी का जरिया बना लिया।
नेटवर्क की गहराई: पहले भी दर्ज हैं कई आपराधिक मामले
Delhi क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि अरविंद कुमार कोई नौसिखिया नहीं है। वह इससे पहले भी इसी तरह के दो अन्य मामलों में संलिप्त रह चुका है। पुलिस अब इस पूरे सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) की जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य ध्यान अब इन दो सवालों पर है:
- इन नकली किताबों की छपाई (Printing) किस गुप्त प्रेस में की जा रही थी?
- दिल्ली के बाहर अन्य किन राज्यों और शहरों में इन किताबों की खेप भेजी गई है?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह रैकेट न केवल सरकार को राजस्व का चूना लगा रहा था, बल्कि छात्रों को घटिया प्रिंटिंग और गलत तथ्यों वाली सामग्री बेचकर उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा था।
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