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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय जॉब मार्केट में एक बड़ा परिवर्तन आ रहा है। लंबे समय से डिग्री को नौकरी पाने का टिकट माना जाता रहा है, लेकिन 2025 में नियोक्ता अधिकतर स्किल्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। लिंक्डइन की 2025 स्किल्स रिपोर्ट के अनुसार, 75% भारतीय भर्तीकर्ताओं का मानना है कि डिग्री से ज्यादा स्किल्स हीरिंग प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। यह बदलाव तकनीकी प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था की मांगों से प्रेरित है। लाखों ग्रेजुएट्स हर साल बाजार में आते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश के पास व्यावहारिक क्षमताओं की कमी होती है, जिससे रोजगार संकट गहरा रहा है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि 2025 में भारतीय कंपनियां उम्मीदवारों से क्या अपेक्षा कर रही हैं, डिग्री की भूमिका क्या बची है और युवाओं को कैसे तैयार होना चाहिए।

जॉब मार्केट का नया परिदृश्य: स्किल्स-फर्स्ट अप्रोच की बढ़ती लोकप्रियता
2025 में भारतीय जॉब मार्केट ‘स्किल्स-फर्स्ट’ मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक रूप से, आईआईटी, आईआईएम या अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों की डिग्री ही नौकरी की गारंटी मानी जाती थी, लेकिन अब कंपनियां डिग्री के बजाय उम्मीदवार की वास्तविक क्षमताओं पर फोकस कर रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 80% नियोक्ता अब स्किल-बेस्ड हीरिंग को अपनाने की योजना बना रहे हैं। इसका कारण यह है कि डिग्री अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करती है, जबकि नौकरी में व्यावहारिक समस्या-समाधान, अनुकूलनशीलता और नवाचार की जरूरत होती है।

उदाहरण के लिए, आईटी सेक्टर में, जहां भारत वैश्विक स्तर पर लीडर है, कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो अब कोडिंग टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क और पोर्टफोलियो की जांच करती हैं, न कि सिर्फ बी.टेक डिग्री की। इसी तरह, मार्केटिंग फील्ड में डिजिटल टूल्स का ज्ञान डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। एक सर्वे से पता चला है कि 2025 में 60% नौकरियां ऐसी होंगी जहां स्किल गैप के कारण भर्ती में देरी हो रही है। यह ट्रेंड न केवल स्टार्टअप्स बल्कि बड़ी कंपनियों में भी दिख रहा है, जहां एआई और ऑटोमेशन ने रूटीन जॉब्स को कम कर दिया है।

2025 की टॉप स्किल्स: नियोक्ताओं की प्राथमिकताएं
भारतीय नियोक्ता 2025 में कुछ विशिष्ट स्किल्स की तलाश कर रहे हैं, जो तकनीकी और सॉफ्ट दोनों श्रेणियों में बंटी हैं। ये स्किल्स नौकरी बाजार की मांगों के अनुरूप हैं, जहां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी प्रमुख हैं। यहां कुछ प्रमुख स्किल्स की सूची दी गई है:

  1. तकनीकी स्किल्स:
  • डेटा एनालिटिक्स और एआई: बिग डेटा का विश्लेषण और मशीन लर्निंग मॉडल्स बनाना। गूगल और अमेजन जैसी कंपनियां इन स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग: एडब्ल्यूएस, एज़्योर जैसे प्लेटफॉर्म्स का ज्ञान, क्योंकि 70% भारतीय बिजनेस क्लाउड पर शिफ्ट हो रहे हैं।
  • साइबर सिक्योरिटी: डेटा ब्रिच के बढ़ते मामलों के बीच यह स्किल क्रिटिकल है।
  1. डिजिटल और बिजनेस स्किल्स:
  • डिजिटल मार्केटिंग: एसईओ, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और कंटेंट क्रिएशन। ई-कॉमर्स बूम के कारण यह डिमांड में है।
  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट: एजाइल मेथडोलॉजी और टूल्स जैसे जिरा का इस्तेमाल।
  1. सॉफ्ट स्किल्स:
  • कम्युनिकेशन और टीमवर्क: रिमोट वर्क के दौर में क्लियर कम्युनिकेशन जरूरी है।
  • लीडरशिप और इमोशनल इंटेलिजेंस: सहानुभूति और टीम लीड करने की क्षमता, जो अब तकनीकी स्किल्स जितनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • अनुकूलनशीलता: तेज बदलते बाजार में नई चीजें सीखने की क्षमता।

शिक्षाबाबा की एक स्टडी के अनुसार, 2025 में सॉफ्ट स्किल्स तकनीकी स्किल्स जितनी ही महत्वपूर्ण होंगी, क्योंकि कंपनियां ऐसे कर्मचारियों चाहती हैं जो न सिर्फ काम करें, बल्कि टीम को मजबूत बनाएं।

डिग्री की भूमिका: पूरी तरह खत्म नहीं, लेकिन बदल रही है
हालांकि स्किल्स का बोलबाला है, लेकिन डिग्री का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। विशेष रूप से रेगुलेटेड फील्ड्स जैसे मेडिसिन, लॉ, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और इंजीनियरिंग में डिग्री अनिवार्य बनी हुई है। नेक्स्ट स्टेप एजुकेशन की रिपोर्ट बताती है कि 2025-26 में इन क्षेत्रों में डिग्री 90% भर्तियों का आधार बनेगी। लेकिन सामान्य डिग्रीज, जैसे बीए या बीकॉम, अब अकेले पर्याप्त नहीं हैं। नियोक्ता डिग्री को बेसिक फाउंडेशन मानते हैं, लेकिन उसके ऊपर सर्टिफिकेशन्स (जैसे कोर्सेरा, उडेमी से) और प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस चाहते हैं।

एक उदाहरण लें: एक एमबीए ग्रेजुएट को अगर डेटा एनालिटिक्स स्किल नहीं है, तो उसे आईआईएम टैग के बावजूद चुनौती मिलेगी। इसके विपरीत, एक डिप्लोमा होल्डर जो पोर्टफोलियो के साथ इंटरव्यू में आता है, उसे प्राथमिकता मिल सकती है। लिंक्डइन पल्स के अनुसार, 2025 में 40% जॉब पोस्टिंग्स में डिग्री को ‘वांछनीय’ लेकिन ‘आवश्यक नहीं’ बताया गया है।

चुनौतियां और अवसर: युवाओं के लिए क्या मतलब?
भारत में हर साल 1.5 करोड़ युवा बाजार में प्रवेश करते हैं, लेकिन केवल 45% हीरयोग्य माने जाते हैं। यह स्किल डेफिसिट एक बड़ी चुनौती है। मीडियम पर प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, ग्रेजुएट्स में सॉफ्ट स्किल्स की कमी के कारण 55% बेरोजगार रह जाते हैं। दूसरी ओर, यह अवसर भी पैदा कर रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे अपस्किलिंग कोर्सेज (मैनिपाल ऑनलाइन, अपग्रेड) से युवा कम समय में स्किल्स हासिल कर सकते हैं।

सरकार की ‘स्किल इंडिया’ पहल 2025 में 4 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखे हुए है, जिसमें एआई, ग्रीन जॉब्स और डिजिटल लिटरेसी पर फोकस है। कंपनियां भी इन-हाउस ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही हैं, जैसे टाटा की ‘फ्यूचर स्किल्स’ अकादमी।

संतुलन ही सफलता की कुंजी:
2025 में भारतीय नियोक्ता डिग्री और स्किल्स के संतुलन को महत्व दे रहे हैं। डिग्री आपको दरवाजे तक ले जा सकती है, लेकिन स्किल्स आपको अंदर बिठाती हैं। युवाओं को सलाह है कि कॉलेज के साथ-साथ इंटर्नशिप, फ्रीलांसिंग और सर्टिफिकेशन्स पर ध्यान दें। निरंतर सीखना ही भविष्य की मांग है। जैसा कि इम्पैक्टियर्स ब्लॉग में कहा गया है, “यह अब डिग्री की दौड़ नहीं, बल्कि टैलेंट की होड़ है।” यदि आप 2025 के जॉब मार्केट में सफल होना चाहते हैं, तो स्किल्स को अपनाएं – क्योंकि यही वह चीज है जो कंपनियां वास्तव में खोज रही हैं।

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