by-Ravindra Sikarwar
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में संदिग्ध रूप से दूषित कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य में इस जहरीली दवा के सेवन से अब तक 19 बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि 5 से 9 अन्य बच्चे गंभीर हालत में हैं और नगपुर के अस्पतालों में वेंटिलेटर पर जीवन रक्षक उपचार करा रहे हैं। यह घटना सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हुई रहस्यमयी बीमारी के रूप में सामने आई, जो अब पूर्ण रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। दवा में मिलावट की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु और मध्य प्रदेश की दवा नियंत्रण प्राधिकरणों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन राजनीतिक विवाद तेज हो गया है, जहां विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे और उनके आवास पर ‘बुलडोजर’ चलाने की मांग उठाई है।
घटना की पूरी समयरेखा और प्रभावित क्षेत्र:
यह दुखद घटनाक्रम 2 सितंबर 2025 को शुरू हुआ, जब छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में एक बच्चे की मौत हो गई। शुरुआत में इसे सामान्य बुखार और सर्दी-जुकाम समझा गया, लेकिन जांच में पता चला कि बच्चे इस कफ सिरप का सेवन कर रहे थे, जिसके बाद उल्टी, पेशाब करने में कठिनाई और किडनी फेलियर जैसे लक्षण प्रकट हो गए। मृतकों में से अधिकांश (17) छिंदवाड़ा से हैं, जबकि बेतूल में दो और पंधुरना में एक बच्चे की मौत हुई। हाल के दो दिनों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा: 7 अक्टूबर को तीन वर्षीय वेदांत काकुड़िया और दो वर्षीय जयूषा यादवांशी की नगपुर में इलाज के दौरान सांसें थम गईं, जबकि 6 अक्टूबर की रात को एक अन्य बच्चे की मौत हुई।
प्रभावित बच्चे मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम आयु के हैं, जो स्थानीय क्लिनिकों में सर्दी-खांसी के इलाज के लिए यह सिरप दिया गया। कुछ बड़े बच्चे ठीक हो चुके हैं, लेकिन शेष गंभीर रूप से बीमार हैं। वर्तमान में, दो बच्चे नगपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में, दो एम्स नगपुर में और एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी है, और डॉक्टरों ने बताया कि विषाक्त पदार्थ के कारण मस्तिष्क क्षति का भी खतरा है।
जहरीली दवा का खुलासा: कोल्ड्रिफ और अन्य सिरपों में मिलावट
मुख्य आरोपी दवा कोल्ड्रिफ है, जिसका निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल्स ने किया था। जांच में पाया गया कि इस सिरप में 45% से अधिक डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक विषैला रसायन मिलाया गया था, जो किडनी और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है। सरकारी मानकों के अनुसार, सिरप में डीईजी की मात्रा 0.1% से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, गुजरात में बने रीलाइफ और रेस्पिफ्रेश टीआर नामक दो अन्य कफ सिरपों के नमूनों में भी डीईजी की घातक मात्रा पाई गई, जिसके चलते इन पर भी तत्काल प्रतिबंध की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दवा नियंत्रण अधिकारियों ने चार नमूनों की जांच की, जो सभी असफल साबित हुए।
जांच और कानूनी कार्रवाई:
मध्य प्रदेश पुलिस ने हत्या के प्रयास और लापरवाही के आरोप में छिंदवाड़ा के परासिया स्थित एक सरकारी बाल रोग विशेषज्ञ प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया, जिन्होंने प्रभावित बच्चों को यह दवा अधिक मात्रा में निर्धारित की थी। पुलिस ने दवा निर्माता कंपनी के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया है और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है। तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के दवा नियंत्रकों ने मिलकर दवा के उत्पादन और वितरण की पूरी श्रृंखला की पड़ताल शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली मौत के 72 घंटे के भीतर जांच न शुरू करने और एक बच्चे का शव कई दिनों बाद खुदाई करने जैसे आरोप लगे हैं, जो कवर-अप का संकेत देते हैं।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और सहायता उपाय:
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 7 अक्टूबर को नगपुर के अस्पतालों का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पुष्टि की कि राज्य सरकार सभी भर्ती बच्चों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी, और कोई वित्तीय बोझ परिवारों पर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 6 अक्टूबर को मृतकों के परिजनों से भेंट की और निर्देश दिए कि छिंदवाड़ा कलेक्टर तीन विशेष टीमें गठित करें, जो नगपुर में इलाज करा रहे बच्चों की मदद करेंगी। इसमें मजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की टीमें शामिल हैं। यादव ने अधिकारियों को राज्य भर में दवाओं की रैंडम जांच के आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार डॉक्टर को रिहा करने का कोई आश्वासन नहीं है, और यदि कोई आपत्ति हो तो वे अदालत का रुख कर सकते हैं।
विपक्ष का तीखा विरोध: न्यायिक जांच और मंत्री के इस्तीफे की मांग
विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर आपराधिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तीखा प्रहार किया। विपक्ष के नेता उमंग सिंहर ने स्वास्थ्य मंत्री (उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला) के घर पर ‘बुलडोजर’ चलाने की मांग की, इसे गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार की नीति से तुलना करते हुए कहा कि मंत्री की गलती से बच्चों की मौत हुई, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? सिंहर ने न्यायिक जांच, 1 करोड़ रुपये मुआवजा और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस विधायक सोहन लाल बाल्मीकि ने बताया कि उन्होंने पहली मौत के बाद कलेक्टर, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। राज्य कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने छिंदवाड़ा का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की और इन मांगों को दोहराया।
मुख्यमंत्री यादव ने कांग्रेस पर पलटवार किया, कहा कि विपक्ष ‘तुच्छ बयानबाजी’ कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का हवाला देते हुए भोपाल गैस त्रासदी में यूनियन कार्बाइड के सीईओ वॉरेन एंडरसन को भागने में मदद करने का ‘पाप’ याद दिलाया, और कहा कि 41 वर्षों के शासन में कांग्रेस ने कभी संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
व्यापक प्रभाव और सबक:
यह घटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में दवा मिलावट की समस्या को उजागर करती है, जहां सस्ती दवाओं के नाम पर विषैले रसायन मिलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डीईजी जैसा पदार्थ सिरप को गाढ़ा बनाने के लिए सस्ता विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन यह घातक साबित होता है। सरकार ने अन्य राज्यों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। छिंदवाड़ा के एडीएम धीरेंद्र सिंह ने पुष्टि की कि पांच बच्चे अभी भी खतरे में हैं, और बचाव अभियान जारी है। परिवारों का दर्द कम करने के लिए तत्काल मुआवजा और कड़ी सजा की मांग तेज हो रही है, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
