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Report by: Arvind Singh

Dabra : मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ ‘ह्यूमन पेपिलोमा वायरस’ (HPV) का टीका लगने के बाद पांच नाबालिग बच्चियों की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई। पिछोर क्षेत्र के बरकरी जिगनिया गांव की रहने वाली इन बच्चियों को आनन-फानन में डबरा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सरकारी टीकाकरण अभियानों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


परिजनों के गंभीर आरोप: लालच देकर ले गए बच्चियों को

Dabra अस्पताल में भर्ती बच्चियों के माता-पिता ने स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मियों पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि रविवार के दिन आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उनकी बच्चियों को बिना पूरी जानकारी दिए घर से ले गए थे।

अभिभावकों का दावा है कि कार्यकर्ताओं ने बच्चियों को यह लालच दिया था कि इस टीके को लगवाने के बदले उन्हें सरकार की ओर से 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी और भविष्य में उनकी शादी के लिए भी सरकारी मदद दी जाएगी। परिजनों के अनुसार, उन्हें यह नहीं बताया गया कि यह कौन सा टीका है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।

टीकाकरण के बाद बिगड़ी स्थिति और अस्पताल में भर्ती

Dabra परिजनों ने बताया कि रविवार को टीका लगने के बाद जब बच्चियां घर लौटीं, तो उन्हें तेज बुखार, लगातार उल्टियां और शरीर में असहनीय दर्द की शिकायत होने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य प्रभाव समझा गया, लेकिन जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो मंगलवार को सभी पांचों बच्चियों को डबरा के सिविल अस्पताल लाया गया।

वर्तमान में बच्चियों का उपचार जारी है। स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर काफी रोष है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की साक्षरता का फायदा उठाकर उन्हें भ्रमित किया गया और बच्चियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की सफाई और जांच के आदेश

Dabra इस पूरे मामले पर ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने परिजनों द्वारा लगाए गए “लालच देने” के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार:

  • विलंब से भर्ती: टीका रविवार को लगाया गया था, जबकि बच्चियां मंगलवार को अस्पताल लाई गईं। इतने समय बाद होने वाली समस्या का सीधा संबंध वैक्सीन से होना संदिग्ध है।
  • वैक्सीन की सुरक्षा: HPV वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। पहले यह निजी अस्पतालों में काफी महंगी (पैड) मिलती थी, लेकिन अब सरकार इसे सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।
  • जांच का आश्वासन: हालांकि विभाग ने वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से इनकार किया है, लेकिन परिजनों के गंभीर आरोपों को देखते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

जहाँ एक ओर सरकार घातक बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण पर जोर दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर सूचनाओं का अभाव और कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी देना गंभीर चिंता का विषय है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चियों की बीमारी का वास्तविक कारण वैक्सीन है या कोई अन्य संक्रमण।


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