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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र लंबे समय से प्रशासनिक अनियमितताओं और देरी का शिकार रहा है। हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, लेकिन अब उच्च न्यायालय के सख्त हस्तक्षेप के बाद मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) ने पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग कोर्स के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत की खबर है जो पिछले कई सत्रों से प्रवेश का इंतजार कर रहे थे। काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी होने के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिसमें उम्मीदवारों को 22 दिसंबर तक पंजीकरण कराने का मौका मिलेगा।

यह मामला तब सामने आया जब एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार और अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग और नर्सिंग काउंसिल की लापरवाही के कारण प्रवेश प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पीजी नर्सिंग कोर्सों को काउंसलिंग से बाहर रखा गया था, जिससे हजारों सीटें खाली रहने का खतरा था। हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल अलग से काउंसलिंग आयोजित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी की जाए, ताकि कोई योग्य छात्र वंचित न रहे।

मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति पिछले कुछ वर्षों से चिंताजनक बनी हुई है। नर्सिंग घोटाले के बाद से कॉलेजों की मान्यता, निरीक्षण और प्रवेश प्रक्रिया में लगातार समस्याएं आ रही हैं। सत्र 2023-24 में विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण कई कोर्सों में जीरो ईयर घोषित करना पड़ा, यानी कोई प्रवेश ही नहीं हुआ। वहीं, 2024-25 सत्र में भी केवल 25 से 30 प्रतिशत सीटें ही भर पाईं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग में सरकारी कॉलेजों की 400 सीटों में से सिर्फ 334 पर प्रवेश हुआ, जबकि 66 खाली रहीं। निजी कॉलेजों में 3376 सीटों के मुकाबले मात्र 350 छात्रों ने दाखिला लिया, जिससे 3018 सीटें रिक्त रह गईं।

इसी तरह एमएससी नर्सिंग में सरकारी कॉलेजों की 405 सीटों में से 335 भरी गईं और 70 खाली रहीं। निजी संस्थानों में 1551 सीटों के खिलाफ केवल 431 प्रवेश हुए, जबकि 1120 सीटें खाली पड़ी रहीं। कुल मिलाकर देखें तो पिछले सत्र में लगभग 75 प्रतिशत सीटें रिक्त रह गईं। यह स्थिति न केवल छात्रों के करियर को प्रभावित कर रही है, बल्कि प्रदेश में नर्सिंग स्टाफ की कमी को भी बढ़ावा दे रही है। कई योग्य छात्र अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि जो यहां रहना चाहते हैं, उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

एनएसयूआई नेताओं ने इस फैसले को नर्सिंग छात्रों की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने हाईकोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि यह केवल उनकी संगठन की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नर्सिंग छात्रों की जीत है। साथ ही, उन्होंने चिकित्सा शिक्षा विभाग से अपील की है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो और समय पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाए। छात्र नेता अक्षय तोमर और रवि परमार ने जोर दिया कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया जरूरी है।

अब सभी की नजरें काउंसलिंग के परिणामों पर टिकी हैं। उम्मीद है कि इस बार अधिक से अधिक सीटें भरेंगी और योग्य छात्रों को मौका मिलेगा। नर्सिंग काउंसिल ने विज्ञप्ति जारी कर सभी पात्र उम्मीदवारों से जल्द रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और सीट आवंटन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार और संबंधित विभागों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि आने वाले सत्रों में ऐसी स्थिति न दोहराई जाए। छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और समय पर सही कदम उठाना सभी की जिम्मेदारी है।

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