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by-Ravindra Sikarwar

जोधपुर/जयपुर: राजस्थान सरकार ने हाल ही में खांसी की एक दवा (डेक्‍सट्रोमेथॉर्फन एचबीआर सिरप) को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने शनिवार को जोधपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह सीरप दोषपूर्ण नहीं है, लेकिन भविष्य में किसी भी जोखिम से बचने के लिए जयपुर स्थित केसन्स फार्मा कंपनी की 19 दवाओं के वितरण और उपयोग पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। यह कदम तीन बच्चों की मौत के दावों के बाद उठाया गया है, जो कथित तौर पर इस दवा से जुड़े हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जांच रिपोर्टों में दवा पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है, फिर भी सतर्कता बरती जा रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि और बच्चों की मौत का मामला:
यह मामला भरतपुर और सीकर जिले से जुड़ा है, जहां पिछले कुछ हफ्तों में बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेक्‍सट्रोमेथॉर्फन एचबीआर सिरप लेने के बाद कुछ बच्चों को उल्टी, चक्कर आना, बेहोशी और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दिए। मीडिया में तीन बच्चों की मौत का जिक्र किया गया, जिनमें से एक चार वर्षीय नित्यांश शर्मा (सीकर) की 29 सितंबर 2025 को मौत हो गई। मंत्री खींवसर ने इन मौतों को दवा से जोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि ये बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों (कोमॉर्बिड कंडीशंस) से जूझ रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बच्चों को यह सीरप डॉक्टरों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया था, बल्कि माता-पिता ने स्वयं दिया था।

स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत प्रभाव से प्रभावित बैचों पर रोक लगा दी और नमूनों को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजा। केंद्रीय औषधि नियंत्रक महानिदेशालय (डीसीजीआई) की नई सलाह के अनुसार, डेक्‍सट्रोमेथॉर्फन वाली दवाएं दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिएं और सामान्यत: पांच वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए ही डॉक्टर की सलाह पर सीमित मात्रा में इस्तेमाल की जानी चाहिए। राजस्थान सरकार ने सभी चिकित्सकों को इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं।

दवा की जांच और रिपोर्ट्स की डिटेल:
मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि दवा की गुणवत्ता की जांच दो चरणों में की गई। पहले राज्य औषधि नियंत्रक ने परीक्षण किया, फिर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) ने स्वतंत्र रूप से जांच की। दोनों रिपोर्टों में दवा को पूरी तरह सुरक्षित पाया गया। खींवसर ने कहा, “हमने दवा की दोहरी जांच कराई। न तो नियंत्रक की रिपोर्ट में कोई खराबी आई और न ही आरएमएससीएल की। इसलिए कंपनी को क्लीन चिट दी गई।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दवा को मंजूरी मिलने के बाद से 1.33 लाख से अधिक लोगों ने इसका सेवन किया है, जिसमें पिछले एक माह में करीब 14,000 लोग शामिल हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा निर्धारित इस दवा से इन तीन मौतों को छोड़कर किसी अन्य मौत की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

कंपनी का इतिहास और सैंपल फेल होने का डेटा:
केसन्स फार्मा कंपनी पर सवाल उठने के बीच मंत्री ने कंपनी के पिछले रिकॉर्ड का जिक्र किया। 2012 से अब तक कंपनी की दवाओं के 10,119 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 42 नमूने घटिया पाए गए। खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान एक ही दवा के 39 नमूने फेल हो गए, जबकि हाल के महीनों में तीन अन्य नमूनों में भी खराबी आई। इन दोहराई गई असफलताओं को देखते हुए ही सावधानी के तौर पर सभी 19 दवाओं पर रोक लगाई गई। मंत्री ने कहा, “भले ही वर्तमान सीरप सुरक्षित हो, लेकिन कंपनी के इतिहास को ध्यान में रखते हुए हमने सभी दवाओं का वितरण रोक दिया है। एक दूसरी समिति गठित की गई है जो कंपनी की सभी दवाओं की गहन जांच करेगी। यदि जनता को संदेह हो, तो किसी भी स्रोत से परीक्षण कराने को तैयार हैं।”

सरकारी कार्रवाई: निलंबन और जांच
इस पूरे प्रकरण में सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। राज्य औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को दवा मानकों निर्धारण प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप के आरोप में निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा, लापरवाही बरतने के लिए हथीदेह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉ. पलक कूलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू सोनी को भी निलंबित किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है, जो घटना की गहन जांच करेगी। आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक पुकाराज सेन ने पुष्टि की कि कंपनी की सभी 19 दवाओं की आपूर्ति अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सलाह जारी की है कि बच्चों में अधिकांश तीव्र खांसी वाली बीमारियां स्वत: ठीक हो जाती हैं और दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए खांसी की सीरप्स का उपयोग सावधानीपूर्वक और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाए।

प्रभावित बच्चों की स्थिति पर अपडेट:
मंत्री ने उन बच्चों की स्थिति पर भी अपडेट दिया जिन्हें सीरप लेने के बाद स्वास्थ्य समस्या हुई। उन्होंने बताया कि विभाग ने तत्काल उपचार सुनिश्चित किया और अधिकांश बच्चे अब ठीक हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

मुख्यमंत्री की मुफ्त दवा योजना पर भरोसा:
खींवसर ने मुख्यमंत्री की मुफ्त दवा योजना की तारीफ की और कहा कि इसमें बहु-स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली है। सरकार जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इस घटना के बाद डेक्‍सट्रोमेथॉर्फन वाली सभी दवाओं पर सभी सप्लायर्स से रोक लगा दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई समस्या न हो।

यह विवाद न केवल दवा गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र की मजबूती की भी मांग करता है। उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। जनता से अपील है कि दवाओं का उपयोग हमेशा डॉक्टर की सलाह पर करें, खासकर बच्चों के मामले में।

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