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By: Ravindra Sikarwar

नर्मदापुरम: जिले के ग्राम जमुनिया में रविवार को कथित धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद गहराता दिखा। रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक निजी मकान में बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण प्रार्थना और कथित ‘चिकित्सा अनुष्ठान’ के लिए एकत्र हुए थे, जिसके बाद स्थानीय लोगों और संगठनों ने इसे धर्मांतरण का प्रयास बताते हुए कड़ा विरोध जताया।

यह घटना प्रकाश में तब आई जब ग्रामीणों ने बताया कि बीमारियों से मुक्ति और कथित ‘शैतानी बाधा’ दूर करने के नाम पर आदिवासी समुदाय के लोगों को यहां बुलाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक महिला अनुष्ठान के दौरान झूमते हुए दिखाई दे रही है, जिसे कई लोगों ने ‘चमत्कारिक इलाज’ बताने की कोशिश मानी।

धन और लाभ का लालच देकर मत परिवर्तन का आरोप
स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों का आरोप है कि अनुष्ठान के दौरान आदिवासी परिवारों को आर्थिक सहायता, मुफ्त उपचार और अन्य लाभ देने की बात कही जा रही थी। विरोध करने वालों का कहना है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि छिपे तरीके से मत परिवर्तन की रणनीति है।

कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि उनसे कहा गया कि यदि वे इस विशेष धर्म को स्वीकार कर लें तो उनके घर के रोग, आर्थिक समस्याएँ और पारिवारिक संघर्ष स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

भारी विरोध और आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय सामाजिक संगठनों और कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर मामले को लेकर आपत्ति जताई। विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियाँ पहले भी आसपास के क्षेत्रों में होती रही हैं, लेकिन इस बार संख्या अधिक होने के कारण मामला गंभीर हो गया।

विरोध करने वालों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

पुलिस मौके पर पहुंची, जांच जारी
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुँची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की और आयोजनकर्ता से इस धार्मिक सभा की अनुमति, उद्देश्य और आर्थिक लेन-देन से जुड़ी जानकारियाँ मांगी हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और यदि धर्म परिवर्तन या आर्थिक शोषण जैसी कोई गतिविधि पाई गई तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

आदिवासी समाज में बढ़ी चिंता
आदिवासी समुदाय के कई सदस्यों ने भी इस घटना पर चिंता जताई। उनका कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण कई लोग बीमारी या समस्या को दैवीय बाधा मान लेते हैं, जिसका फायदा कुछ समूह उठाते हैं।

कुछ वरिष्ठ ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन लालच देकर या भ्रम फैलाकर मत परिवर्तन कराना पूरी तरह गलत है।

नर्मदापुरम की यह घटना सामाजिक और धार्मिक स्तर पर संवेदनशील बन गई है। एक ओर जहां ग्रामीण कथित चमत्कारी उपचार पर भरोसा दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले इसे आदिवासी समाज की आस्था और पहचान पर हमला बता रहे हैं।

आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई यह तय करेगी कि मामला धार्मिक आयोजन के दायरे में आता है या फिर यह वास्तव में धर्मांतरण का सुनियोजित प्रयास था।

फिलहाल, क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है।

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