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By: Ravindra Sikarwar

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक धार्मिक स्थल के परिसर में आयोजित क्रिसमस समारोह ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सिरगिट्टी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मंदिर परिसर में ईसाई समुदाय की संस्था ‘नवजीवन सेवा समिति’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कथित तौर पर मांसाहारी भोजन तैयार किया गया था, जिसकी जानकारी स्थानीय हिंदू संगठनों को लगते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। आयोजकों पर प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति न लेने का भी आरोप लगा है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की शिकायतें सामने आईं।

यह कार्यक्रम क्रिसमस के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें उपहार वितरण और उत्सव की अन्य व्यवस्थाएं भी शामिल थीं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में शामिल लोगों के लिए नॉनवेज व्यंजन बनाए जा रहे थे, जो मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर पूरी तरह अनुचित माना गया। स्थानीय निवासियों और हिंदू संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता का सम्मान करना सभी का दायित्व है और ऐसे आयोजन से समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। विशेष रूप से, मंदिर परिसर में मांसाहारी भोजन की मौजूदगी को धार्मिक मान्यताओं का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।

जैसे ही यह जानकारी फैली, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और जोरदार विरोध जताया। नारेबाजी हुई और आयोजकों से कार्यक्रम तुरंत रोकने की मांग की गई। स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद सिरगिट्टी थाना की पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से वार्ता की और शांति बनाए रखने की गुजारिश की। हिंदू संगठनों की ओर से थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आयोजकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि बिना अनुमति ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद क्रिमिनल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत निवारक कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक स्थान पर कार्यक्रम करने के लिए जिला प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना इसकी अनदेखी करने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। पुलिस ने आयोजकों से संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है और पूछताछ की जा रही है। साथ ही, इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

यह घटना छत्तीसगढ़ में धार्मिक आयोजनों और समुदायों के बीच संवेदनशील मुद्दों को फिर से उजागर करती है। राज्य में पहले भी धर्मांतरण, प्रार्थना सभाओं और धार्मिक स्थलों पर आयोजनों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं, जिससे आपसी सद्भाव पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को पहले से सतर्क रहना चाहिए और सभी समुदायों को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करना जरूरी है।

प्रशासन ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी आयोजन को नियमों के दायरे में ही करें। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में माहौल शांत है, लेकिन पुलिस की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। इस घटना से स्थानीय लोग भी चिंतित हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सकेगा।

यह मामला न केवल धार्मिक संवेदनशीलता का प्रश्न उठाता है, बल्कि सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और अनुमति प्रक्रिया पर भी ध्यान आकर्षित करता है। आने वाले त्योहारों के मौसम में प्रशासन को और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होगी ताकि सामाजिक एकता बनी रहे।

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