by-Ravindra Sikarwar
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब पूर्व AIADMK मंत्री और राज्यसभा सांसद सी.वी.ई. शानमुगम ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर तीखा प्रहार किया। एक बूथ समिति प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए शानमुगम ने डीएमके सरकार की मुफ्त योजनाओं पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि स्टालिन भविष्य में वोट हासिल करने के लिए ‘मुफ्त पत्नियां’ भी बांट सकते हैं। इस टिप्पणी ने महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों में तीखी निंदा को जन्म दिया है। विपक्षी दल डीएमके और सीपीएम ने इसे ‘महिला-विरोधी’ करार देते हुए शानमुगम की माफी की मांग की है।
बयान का पूरा विवरण:
घटना चेन्नई के एक स्थानीय सभागार में हुई, जहां AIADMK की बूथ स्तर की कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। शानमुगम, जो पूर्व में कानून मंत्री रह चुके हैं, ने अपने भाषण में डीएमके की लोकप्रिय मुफ्त उपहार योजनाओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “वे मिक्सर, ग्राइंडर, बकरियां और गायें मुफ्त में देंगे, और आगे चलकर क्यों नहीं, हर व्यक्ति को एक पत्नी भी मुफ्त में थमा देंगे।” उन्होंने इस टिप्पणी को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से जोड़ते हुए उन्हें ‘कड़ुनानिधि का बेटा’ कहकर संबोधित किया, जो डीएमके की वेलफेयर पॉलिसी को चुनावी चारा बताने का प्रयास था।
शानमुगम का यह बयान AIADMK की आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वे डीएमके की योजनाओं जैसे मुफ्त बस यात्रा, लैपटॉप वितरण और महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता को ‘लोकलुभावन’ बताकर हमला बोल रहे हैं। लेकिन इस टिप्पणी ने महिलाओं को वस्तु के रूप में चित्रित करने के कारण व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया। सत्र में मौजूद कार्यकर्ताओं ने शुरुआत में तालियां बजाईं, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही यह राजनीतिक बवाल बन गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
डीएमके ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए शानमुगम के बयान को ‘घिनौना’ और ‘महिलाओं के अपमानजनक’ बताया। पार्टी की महिला विंग प्रमुख और मंत्री तिरुमुगि गीता जीवन ने कहा, “क्या शानमुगम जयललिता के समय ऐसी बातें कहते? यह बयान AIADMK की पुरुष-प्रधान मानसिकता को उजागर करता है।” उन्होंने डीएमके सरकार की महिलाओं के सशक्तिकरण योजनाओं का हवाला दिया, जैसे ‘विदियाल पयानम’ योजना के तहत मुफ्त बस यात्रा और ‘पुधुमाई पेन’ स्कीम, जो लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती है। गीता ने पूर्व मुख्यमंत्री ई.पी.एस. पलानीस्वामी से सवाल किया कि क्या वे अपनी पार्टी में ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त करेंगे।
सीपीएम के राज्य महासचिव पी. शानमुगम ने भी बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे ‘गहन अपमानजनक’ करार देते हुए कहा कि यह महिलाओं को वस्तु बनाने वाली पुरानी सोच का प्रतीक है। सीपीएम ने AIADMK महासचिव एडाप्पादी के. पलानीस्वामी से शानमुगम पर कार्रवाई की मांग की। विपक्षी दलों के अलावा, महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर #BoycottShanmugam जैसे अभियान चला दिए। कई यूजर्स ने इसे ‘मिसोजिनिस्टिक’ बताते हुए AIADMK की छवि पर सवाल उठाए।
AIADMK की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी स्रोतों के अनुसार, नेतृत्व इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। शानमुगम ने बाद में स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि उनका इरादा व्यंग्य था, न कि अपमान, लेकिन यह सफाई ने आग को और भड़का दिया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ:
यह विवाद तमिलनाडु की तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच आया है, जहां डीएमके की वेलफेयर योजनाएं AIADMK के प्रमुख हमलों का केंद्र बनी हुई हैं। एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने पिछले चार वर्षों में कई महिलाओं-केंद्रित पहल की हैं, जैसे 1,000 रुपये मासिक सहायता योजना, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं। इनका उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, AIADMK इन योजनाओं को ‘चुनावी जाल’ बताकर आलोचना करती रही है।
सी.वी.ई. शानमुगम, जो 2022 में राज्यसभा सदस्य चुने गए, AIADMK के कट्टर समर्थक हैं। वे पूर्व में जयललिता सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पार्टी की चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनका यह बयान पार्टी की आंतरिक मीटिंग्स में व्यंग्य के रूप में इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इसे गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले डीएमके को घेरने की कोशिश है, लेकिन इससे AIADMK की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
समाज और कानूनी प्रभाव:
इस बयान ने महिलाओं के अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। तमिलनाडु महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करने की घोषणा की है। सामाजिक कार्यकर्ता राधिका ने कहा, “ऐसी टिप्पणियां राजनीतिक भाषण को जहरीला बनाती हैं। महिलाओं को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय सशक्त बनाना चाहिए।” सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट्स के साथ अभियान चल रहा है, जिसमें शानमुगम से सार्वजनिक माफी की मांग की जा रही है।
यह घटना तमिलनाडु की राजनीति में लिंग-आधारित टिप्पणियों की एक कड़ी जोड़ती है। पहले भी AIADMK नेताओं पर महिलाओं की योजनाओं का मजाक उड़ाने के आरोप लगे हैं, जैसे ‘लिपस्टिक लगी बसें’ कहना। डीएमके ने इसे AIADMK की ‘महिला-विरोधी’ नीति का प्रमाण बताते हुए जनता से समर्थन मांगा है।
आगे की संभावनाएं:
विवाद बढ़ने के साथ AIADMK पर दबाव बढ़ रहा है। यदि पलानीस्वामी ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो यह पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकता है। डीएमके इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है, खासकर महिलाओं के बीच समर्थन मजबूत करने के लिए। मुख्यमंत्री स्टालिन ने अभी तक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे ‘हास्यास्पद’ बताते हुए खारिज कर दिया। यह मामला राजनीतिक बहस को और गर्माएगा, और देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे चुनावी समीकरण प्रभावित होते हैं।
यह घटना एक बार फिर राजनीतिक भाषणों में संवेदनशीलता की आवश्यकता पर जोर देती है, जहां व्यंग्य कभी-कभी अपमान में बदल जाता है।
