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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक ऐसा बयान देकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि राज्य की महिलाएं देश में सबसे ज्यादा शराब का सेवन करती हैं। उनके इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और उनसे व कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से माफी की मांग की है।

जीतू पटवारी का विवादास्पद बयान:
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण मध्य प्रदेश में शराब का सेवन बढ़ गया है। उन्होंने कहा, “सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश की महिलाएं किसी भी अन्य राज्य की महिलाओं की तुलना में अधिक शराब का सेवन करती हैं। यह भाजपा सरकार की शराब-समर्थक नीतियों का सीधा परिणाम है।”

पटवारी ने अपने बयान के समर्थन में कुछ सरकारी सर्वेक्षणों और स्वास्थ्य रिपोर्टों का हवाला दिया, जिसमें शराब की खपत में वृद्धि दिखाई गई है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य में शराब की बिक्री को बढ़ावा दिया है, जिससे सामाजिक ताना-बाना बिगड़ रहा है।

भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया:
पटवारी के इस बयान पर भाजपा ने तुरंत पलटवार किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पटवारी के बयान को ‘महिलाओं का अपमान’ और ‘मध्य प्रदेश की छवि खराब करने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि यह बयान न केवल राज्य की महिलाओं का अनादर है, बल्कि यह कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को भी दर्शाता है।

  • माफी की मांग: भाजपा ने जीतू पटवारी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। इसके साथ ही, भाजपा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी इस बयान पर स्पष्टीकरण देने और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
  • आंकड़ों पर सवाल: भाजपा नेताओं ने पटवारी द्वारा उद्धृत किए गए आंकड़ों की सत्यता पर भी सवाल उठाया और कहा कि वे गलत जानकारी फैला रहे हैं।

पटवारी का अपने बयान पर कायम रहना:
इस राजनीतिक दबाव के बावजूद, जीतू पटवारी अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने एक और बयान जारी कर कहा कि वह किसी भी महिला का अपमान नहीं करना चाहते थे, बल्कि उनका उद्देश्य सरकारी नीतियों की आलोचना करना था। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ उन सरकारी आंकड़ों को सामने ला रहा हूँ, जो बताते हैं कि शराब का सेवन कितना बढ़ गया है। अगर भाजपा सरकार को सच सुनना पसंद नहीं है, तो यह उनकी समस्या है।”

इस मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहाँ कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इस बयान को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

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