Congress Control : मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत हाल ही में 71 जिलाध्यक्षों की एक साथ नियुक्ति की गई थी। उस समय यह संकेत दिए गए थे कि जिलाध्यक्ष न केवल चुनावी टिकटों की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगे, बल्कि ब्लॉक, वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार में भी उन्हें खुली छूट मिलेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों को निचले स्तर की कमेटियों के गठन में पूरी स्वतंत्रता नहीं दी है, जिससे संगठनात्मक ढांचे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिलाध्यक्ष बने, लेकिन अधिकार सीमित
Congress Control प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा पिछले दो दिनों से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में ली जा रही बैठकों के दौरान यह स्थिति साफ तौर पर सामने आई। इन बैठकों में भोपाल संभाग सहित सभी जिलों के पदाधिकारियों को बुलाया गया था। जिलाध्यक्षों को संगठन विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश तो दिए गए, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि ब्लॉक, वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर की कमेटियों के गठन में उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने की छूट नहीं होगी। यानी जिलाध्यक्ष पद तो मिला, पर अधिकारों की स्पष्ट सीमाएं तय कर दी गईं।
Congress Control जमीनी संगठन को मजबूत करने की रणनीति
Congress Control बैठकों में पार्टी नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन को गांव और वार्ड स्तर तक मजबूत करना समय की जरूरत है। इसके लिए ग्राम पंचायत और वार्ड कमेटियों के गठन की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा हुई। साथ ही आगामी जनसंपर्क अभियानों, संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर रणनीतिक दिशा तय की गई। नेतृत्व का मानना है कि बिना मजबूत जमीनी ढांचे के पार्टी का विस्तार और जनआधार बढ़ाना मुश्किल है।
प्रदेश अध्यक्ष का संदेश
Congress Control प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बैठक में कहा कि कांग्रेस की असली ताकत उसका जमीनी संगठन है। ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर मजबूत कमेटियां ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देती हैं और आम जनता की आवाज को प्रभावी मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने जिलाध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों से अपील की कि वे संगठनात्मक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा, सक्रियता और समर्पण के साथ निभाएं। साथ ही यह भी संकेत दिया कि संगठन में अनुशासन और समन्वय बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस नेतृत्व संगठन विस्तार को लेकर गंभीर है, लेकिन जिलाध्यक्षों को पूरी छूट देने के बजाय नियंत्रण और संतुलन के साथ आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
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