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By: Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: उत्तर भारत के बड़े हिस्से में कड़ाके की सर्दी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक ठंड और कोहरे का कहर बरप रहा है। राजस्थान में कई शहरों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया होने से सड़कें, रेलवे और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पहाड़ों पर तो स्थिति और भी विकट है, जहां उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में पारा माइनस 20 डिग्री तक पहुंच गया है।

राजस्थान में इस सीजन की सबसे सख्त ठंड पड़ रही है। बुधवार रात को राज्य के कई हिस्सों में तापमान ने पिछले रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। कम से कम पांच शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे ठंडा स्थान नागौर रहा, जहां पारा 3.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। इसके बाद फतेहपुर में 3.8 डिग्री, लूणकरणसर में 4.3 डिग्री और डूंगरपुर में 4.9 डिग्री तापमान रहा। ठंड के इस प्रकोप से लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। सुबह और शाम के समय सड़कें वीरान नजर आ रही हैं। गरीब और मजदूर वर्ग के लोग अलाव जलाकर और गर्म कपड़ों में लिपटकर किसी तरह ठंड से बचाव कर रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है, क्योंकि सुबह के समय कड़ाके की ठंड में बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है।

उत्तर प्रदेश में कोहरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। गुरुवार सुबह राज्य के लगभग 30 जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी कई जगहों पर शून्य से 10 मीटर के बीच रह गई। प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, लखनऊ सहित पूर्वांचल और अवध के कई इलाकों में सुबह के समय कुछ मीटर आगे भी दिखाई नहीं दे रहा था। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ रहा है। कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। पिछले चार दिनों में राज्य में कोहरे से जुड़े 150 से अधिक सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 28 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। ज्यादातर हादसे कम दृश्यता के कारण सामने से आ रहे वाहनों को न देख पाने से हुए हैं।

कोहरे का असर हवाई और रेल यातायात पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई एयरपोर्ट्स पर उड़ानें देरी से चल रही हैं। कम से कम सात फ्लाइटें लेट हुईं, एक फ्लाइट रद्द करनी पड़ी और एक को दूसरे एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ा। रेलवे की दर्जनों ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। स्टेशनों पर इंतजार कर रहे लोग ठंड और कोहरे से दोहरी मार झेल रहे हैं।

पहाड़ी राज्यों में ठंड चरम पर है। उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध सिख तीर्थ हेमकुंड साहिब में बुधवार को तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। आश्चर्य की बात यह है कि नवंबर के बाद यहां बर्फबारी नहीं हुई, फिर भी इतनी भीषण ठंड के कारण हेमकुंड सरोवर पूरी तरह जम चुका है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फीली हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान और नीचे जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में भी इसी तरह की स्थिति है, जहां बर्फबारी के बाद ठंड ने जीवन को स्थिर सा कर दिया है।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में इसी तरह की ठंड और कोहरे की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की कमी और उत्तरी हवाओं के कारण यह ठंड का दौर लंबा खिंच सकता है। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, गर्म कपड़े पहनें और वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ठंड से संबंधित बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम, अस्थमा और जोड़ों के दर्द से बचाव के उपाय करने की सलाह दी है।

यह ठंड का मौसम न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि कृषि और पशुपालन पर भी असर डाल रहा है। फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है और पशुओं को ठंड से बचाने के इंतजाम करने पड़ रहे हैं। कुल मिलाकर, उत्तर भारत इस समय प्रकृति के इस कठोर रूप का सामना कर रहा है और राहत की उम्मीद अभी दूर नजर आ रही है।

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