By: Ravindra Sikarwar
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि इस घोटाले में गिरफ्तार कई आरोपियों के पुराने संबंध सपा से जुड़े हुए हैं। सीएम ने कहा कि राज्य में सक्रिय अधिकांश माफिया तत्वों का किसी न किसी रूप में सपा से जुड़ाव रहा है, और यह कोई नई बात नहीं है।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच से ही कुछ गिरफ्तार अभियुक्तों के सपा से लिंक सामने आ चुके हैं। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर व्यंग्य कसते हुए एक मशहूर शेर का जिक्र किया: “यही कसूर मैं बार-बार करता रहा, धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा।” उनका इशारा साफ था कि अखिलेश यादव जिन माफियाओं के साथ फोटो खिंचवाते रहे हैं, उनसे जुड़े अवैध कारोबार की संलिप्तता जांच में उजागर हो सकती है। सीएम ने जोर देकर कहा कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा, लेकिन जांच को पूरा होने दीजिए – “दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोडीन फॉस्फेट एक नियंत्रित पदार्थ है, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत आता है। इसका इस्तेमाल गंभीर खांसी के इलाज के लिए बने कफ सिरप में होता है, और इसका कोटा केवल केंद्र सरकार के नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा अधिकृत कंपनियों को दिया जाता है।
हालांकि, कई जगहों पर इस सिरप का नशीले पदार्थ के रूप में दुरुपयोग हो रहा था। शिकायतें मिलने के बाद यूपी पुलिस, एसटीएफ और एफएसडीए ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की। अब तक बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी का पता चला है, सैकड़ों बोतलें जब्त की गई हैं और कई गिरफ्तारियां हुई हैं। जांच में धन के लेन-देन के रास्ते और सभी संबंधित पहलू सामने आएंगे। यह मामला करीब दो हजार करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कई जिलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
इस बयान के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। उन्होंने भी सपा पर हमले को दोहराया और कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें कथित आरोपियों को अखिलेश यादव के साथ देखा जा सकता है।
दूसरी तरफ, सपा इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है। अखिलेश यादव ने भी शायराना अंदाज में पलटवार किया है, लेकिन जांच की प्रक्रिया जारी रहने से इस विवाद के और तूल पकड़ने की संभावना है।
यह मामला न केवल नशे की तस्करी को रोकने की दिशा में सरकार की मुहिम को रेखांकित करता है, बल्कि आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र में भी जोरदार बहस का विषय बनेगा। राज्य सरकार का दावा है कि अपराध और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। जांच के नतीजे क्या होंगे, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह प्रकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
