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by-Ravindra Sikarwar

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे एक साहसिक अभियान के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। 209 कोबरा बटालियन के जवान संदीप कुमार को जंगल में सांप ने काट लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। यह हादसा न केवल सुरक्षा बलों की कठिनाइयों को उजागर करता है, बल्कि उन बहादुर सैनिकों के लिए भी एक कड़वी याद ताजा कर देता है जो दुर्गम इलाकों में राष्ट्र की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह घटना नुरधा जंगल में चोटानाग्रा थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटी, जहां संदीप कुमार एक प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवादी समूह के खिलाफ ऑपरेशन में तैनात थे।

घटना की कालक्रम के अनुसार, अभियान मंगलवार रात या बुधवार सुबह के आसपास शुरू हुआ था, जब कोबरा (कॉम्बैट बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन) की टीम नक्सल प्रभावित क्षेत्र में घुसपैठियों को घेरने के लिए रवाना हुई। घने जंगलों और असमतल इलाकों में सतर्कता बरतते हुए संदीप कुमार अचानक एक जहरीले सांप के संपर्क में आ गए। साथी जवानों ने तुरंत उन्हें बचाने का प्रयास किया और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन विषाक्तता के कारण उनकी हालत बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद, संदीप कुमार ने दम तोड़ दिया, जो 1 अक्टूबर 2025 को दोपहर तक की आधिकारिक पुष्टि हुई। पश्चिम सिंहभूम जिला, जो नक्सलवाद का एक प्रमुख गढ़ रहा है, में ऐसी घटनाएं सुरक्षा बलों के लिए आम चुनौती बन चुकी हैं, जहां जंगली जानवरों और विषैले सरीसृपों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।

संदीप कुमार के बारे में ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी बटालियन के सहयोगियों के अनुसार, वे एक समर्पित और अनुभवी जवान थे, जो बिहार या झारखंड के किसी ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखते थे। कोबरा बटालियन, जो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का विशेष इकाई है, का गठन 2009 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए किया गया था। यह इकाई घने जंगलों में गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग लेकर काम करती है और अब तक सैकड़ों नक्सली मुठभेड़ों में सफल रही है। संदीप की मौत ने इस बटालियन के 209 यूनिट को गहरा सदमा पहुंचाया है, जहां वे नियमित रूप से ऐसे खतरनाक मिशनों पर तैनात रहते थे। अभियान का उद्देश्य प्रतिबंधित संगठनों जैसे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) या अन्य वामपंथी गुटों को नेस्तनाबूद करना था, जो इस क्षेत्र में हथियारबंद गतिविधियां चला रहे हैं।

इस दुखद घटना पर तत्काल प्रतिक्रियाएं आने लगीं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया और कहा, “संदीप कुमार जैसे वीर सपूतों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम उनके परिवार के साथ खड़े हैं और सुरक्षा बलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाएंगे।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आधिकारिक बयान जारी कर श्रद्धांजलि दी, जिसमें उन्होंने संदीप को “राष्ट्र रक्षक” करार दिया और कहा कि उनकी बहादुरी हमेशा याद रखी जाएगी। सीआरपीएफ के महानिदेशक ने बटालियन को संदेश भेजा कि संदीप की शहादत से प्रेरणा लें और अभियान जारी रखें। स्थानीय स्तर पर, चोटानाग्रा थाने में जवानों ने सलामी सभा आयोजित की, जबकि रांची में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने की तैयारी चल रही है। सोशल मीडिया पर #RIP_SandeepKumar और #JawanKiShaan जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जहां हजारों लोग अपनी संवेदनाएं साझा कर रहे हैं। पूर्व सैनिक संगठनों ने भी परिवार को आर्थिक सहायता का वादा किया है।

यह घटना झारखंड में सांप काटने की बढ़ती मौतों को भी रेखांकित करती है, जहां मानसून के बाद जंगलों में ऐसी दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी और विष निवारक दवाओं की अनुपलब्धता जानलेवा साबित हो रही है। राज्य सरकार ने पहले ही आदेश जारी कर दिया है कि जंगली अभियानों में एंटी-स्नेक वेनम किट्स अनिवार्य हों और जवानों को अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया जाए। संदीप की शहादत ने न केवल सुरक्षा बलों में शोक की लहर पैदा की है, बल्कि पूरे राष्ट्र को एकजुट कर दिया है। उनका बलिदान नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया संकल्प जोड़ता है, जहां हर जवान का योगदान अमूल्य है। परिवार को सांत्वना देते हुए, सभी की प्रार्थना है कि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों और शहीदों का सपना साकार हो।

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