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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का नाम तक अंग्रेजों द्वारा दिया गया था, और इसकी जड़ें भारतीय संस्कृति और मूल्यों से पूरी तरह जुड़ी नहीं हैं। इस कार्यक्रम में सीएम ने भारतीय जनसंघ की विरासत को याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा को जन-केंद्रित और राष्ट्रवादी बताकर उसका गुणगान किया। यह बयान मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी को और तेज करने वाला माना जा रहा है।

कार्यक्रम का अवलोकन
भोपाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में BJP के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। यह आयोजन एकता और अंत्योदय के सिद्धांतों को बढ़ावा देने वाले पंडित दीनदयाल के योगदान को याद करने के लिए था। कार्यक्रम में उनके एकात्म मानववाद और अंत्योदय दर्शन पर चर्चा की गई, जो BJP की विचारधारा का आधार माने जाते हैं। सीएम मोहन यादव ने इस अवसर पर पंडित दीनदयाल को एक दूरदर्शी विचारक बताते हुए उनकी शिक्षाओं को आज के समय में प्रासंगिक बताया।

कांग्रेस पर सीएम का हमला:
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी का नाम तक अंग्रेजों ने रखा था। यह पार्टी भारत की आत्मा और संस्कृति को पूरी तरह नहीं समझती। इसके विपरीत, जनसंघ और BJP की जड़ें भारतीय मूल्यों और जनता की सेवा में गहरी हैं।” यह बयान कांग्रेस की स्थापना के ऐतिहासिक संदर्भ की ओर इशारा करता है, जब 1885 में ए. ओ. ह्यूम, एक ब्रिटिश सिविल सेवक, ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यादव ने कांग्रेस की नीतियों पर भी निशाना साधा और दावा किया कि उनकी पार्टी का शासनकाल जनता के कल्याण और विकास पर केंद्रित रहा है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा सत्ता को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “BJP पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत पर चलती है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर जोर देता है। कांग्रेस का ऐसा कोई दर्शन नहीं है।”

जनसंघ और BJP की विरासत पर जोर:
सीएम यादव ने भारतीय जनसंघ, जो BJP का पूर्ववर्ती संगठन था, की विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत की एकता और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए की थी। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को BJP की नीतियों का आधार बताया, जो आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता को संतुलित करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में BJP सरकार ने दीनदयाल के सिद्धांतों को लागू करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे कि गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, और ग्रामीण विकास कार्यक्रम। यादव ने दावा किया कि इन योजनाओं ने राज्य में गरीबी कम करने और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रियाएं:
मोहन यादव का यह बयान मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद से BJP और कांग्रेस के बीच चल रही तीखी राजनीतिक जंग का हिस्सा माना जा रहा है। BJP ने पिछले चुनाव में भारी जीत हासिल की थी, और यादव के नेतृत्व में पार्टी अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस तरह के बयानों को “विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने” की रणनीति के रूप में देख रही है।

कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने जवाब में कहा, “मुख्यमंत्री को इतिहास की आधी-अधूरी बातें करने के बजाय मध्य प्रदेश में बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई, और यह बात सभी जानते हैं।” इस बयान ने दोनों पार्टियों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का महत्व:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916-1968) भारतीय जनसंघ के प्रमुख विचारक और नेता थे। उनके एकात्म मानववाद का दर्शन आर्थिक और सामाजिक नीतियों में भारतीय मूल्यों को शामिल करने पर जोर देता है। उनकी जयंती हर साल BJP और उसके समर्थकों द्वारा उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में कई जगहों पर रक्तदान शिविर, सामाजिक सेवा कार्यक्रम, और विचार-गोष्ठियां आयोजित की गईं।

निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री मोहन यादव का भोपाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर दिया गया भाषण BJP की वैचारिक ताकत और कांग्रेस के खिलाफ उनकी रणनीति को दर्शाता है। कांग्रेस पर “अंग्रेजों द्वारा नामकरण” का आरोप लगाकर उन्होंने राजनीतिक बहस को नया आयाम दिया। यह बयान न केवल मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना है, बल्कि यह BJP की रणनीति को भी रेखांकित करता है, जो भारतीय मूल्यों और जनसंघ की विरासत पर आधारित है। इस तरह के बयान आगामी समय में दोनों पार्टियों के बीच और तीखी बहस को जन्म दे सकते हैं।

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