by-Ravindra Sikarwar
ग्वालियर: विजयादशमी के उत्सव के दौरान ग्वालियर में एक अप्रत्याशित घटना ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा टीम और स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षद के बीच शमी वृक्ष पूजा के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर तीखी झड़प हो गई। यह टकराव सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में हुआ, जिसने BJP के भीतर आंतरिक मतभेदों को उजागर किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद तनाव कम हुआ।
घटना का विवरण:
यह घटना गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को ग्वालियर के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर हुई, जहां विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक शमी वृक्ष पूजा का आयोजन किया गया था। शमी पूजा दशहरा उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल होते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो ग्वालियर के प्रभावशाली राजनेता और पूर्व शाही परिवार के वंशज हैं, इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय BJP पार्षद, जिनका नाम अभी तक आधिकारिक तौर पर उजागर नहीं किया गया है, ने समारोह के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न होने की शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक, पार्षद ने आरोप लगाया कि सिंधिया की सुरक्षा टीम ने उन्हें पूजा स्थल पर उचित स्थान या सम्मान नहीं दिया, जिसे उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा पर आघात माना। जवाब में, सुरक्षा कर्मियों ने प्रोटोकॉल और भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता का हवाला देते हुए पार्षद को पीछे हटने के लिए कहा।
यह तर्क-वितर्क जल्द ही गरमागरम बहस में बदल गया, और दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उपस्थित भीड़ ने इस टकराव को देखा, जिससे उत्सव का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने इस घटना को BJP के भीतर गुटबाजी और स्थानीय नेताओं के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताया।
पुलिस का हस्तक्षेप:
स्थिति बिगड़ते देख ग्वालियर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने पार्षद और उनके समर्थकों को समझा-बुझाकर अलग किया, जबकि सिंधिया की सुरक्षा टीम को भी स्थिति को और न बिगाड़ने की सलाह दी। ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की कि कोई हिंसक घटना नहीं हुई और स्थिति को जल्दी ही नियंत्रित कर लिया गया। उन्होंने कहा, “हमने दोनों पक्षों से बात की और शांति बनाए रखने की अपील की। इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।”
BJP के भीतर आंतरिक मतभेद:
यह घटना ग्वालियर में BJP के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान को उजागर करती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो 2020 में कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए थे, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक प्रमुख नेता हैं। हालांकि, उनकी उपस्थिति और प्रभाव ने कुछ स्थानीय BJP नेताओं के बीच असंतोष पैदा किया है, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव को चुनौती के रूप में देखते हैं। इस टकराव को कई लोग स्थानीय नेतृत्व और सिंधिया के समर्थकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।
स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना BJP के लिए आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि यह पार्टी की एकता पर सवाल उठाती है। कुछ कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर जब दशहरा जैसे त्योहारों का समय एकता और उत्साह का प्रतीक होता है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव:
इस घटना ने ग्वालियर में सामाजिक और धार्मिक माहौल को प्रभावित किया है। शमी पूजा जैसे पारंपरिक अनुष्ठान सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक हैं, लेकिन इस टकराव ने उत्सव की भावना को कमजोर किया। स्थानीय लोगों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक आयोजनों की पवित्रता को ठेस पहुंचाती हैं।
BJP के स्थानीय नेताओं ने इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे दोनों पक्षों के साथ बातचीत करेंगे ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और पार्टी के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया:
जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और भविष्य में सार्वजनिक आयोजनों में बेहतर समन्वय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का फैसला किया है। ग्वालियर के जिला कलेक्टर ने आयोजकों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे समारोहों में प्रोटोकॉल और भीड़ प्रबंधन के लिए पहले से योजना बनाई जाए। साथ ही, पुलिस को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
निष्कर्ष:
ग्वालियर में विजयादशमी के दौरान हुआ यह टकराव न केवल BJP के भीतर आंतरिक मतभेदों को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक तनाव कैसे माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। यह घटना पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें आंतरिक एकता को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, यह समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को राजनीति से अलग रखा जाए।
