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by-Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: गांधी जयंती के अवसर पर ग्वालियर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। यह विवाद तब शुरू हुआ जब BJP नेताओं ने कथित तौर पर कांग्रेस के झंडों को उखाड़ दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और मामला टकराव तक पहुंच गया। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर महात्मा गांधी के प्रति अनादर का आरोप लगाया, जिसने शहर में चल रहे उत्सव के माहौल के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को और उजागर कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

घटना का विवरण:
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में ग्वालियर के एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर दोनों दलों ने अलग-अलग श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यक्रम स्थल पर पार्टी के झंडे लगाए थे, जो BJP नेताओं को नागवार गुजरे। BJP कार्यकर्ताओं ने इन झंडों को हटाने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर गांधी जी के आदर्शों और उनके प्रति सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह घटना दोपहर के समय हुई, जब दोनों दलों के समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद थे। विवाद के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि आसपास के लोग भी इस घटना की ओर आकर्षित हो गए। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक नाटक करार दिया, जबकि अन्य ने इसे गांधी जयंती जैसे पवित्र अवसर पर अनुचित व्यवहार बताया।

पुलिस का हस्तक्षेप:
स्थिति बिगड़ते देख स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने दोनों दलों के नेताओं से बातचीत कर तनाव को कम किया और भीड़ को तितर-बितर करने में सफल रही। ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और इस तरह के विवादों से बचने की अपील की।

दोनों दलों के आरोप:
BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने गांधी जयंती के अवसर का उपयोग अपनी पार्टी के प्रचार के लिए किया, जो महात्मा गांधी के प्रति श्रद्धांजलि के भाव को कमजोर करता है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने BJP पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर उनके झंडों को हटाकर उकसाने की कोशिश की और गांधी जी के प्रति अनादर दिखाया। दोनों पक्षों ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव:
यह घटना ग्वालियर में BJP और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाती है। विशेष रूप से, गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर इस तरह की घटना ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा की है। कई नागरिकों ने दोनों दलों की इस हरकत को शर्मनाक बताया और कहा कि इससे गांधी जी के शांति और अहिंसा के संदेश को ठेस पहुंचती है।

स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि दोनों दल इस घटना का उपयोग अपने समर्थकों को एकजुट करने के लिए कर सकते हैं। साथ ही, यह घटना ग्वालियर में राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है, खासकर तब जब दशहरा और दीवाली जैसे त्योहार नजदीक हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया:
जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और दोनों दलों के नेताओं को नोटिस जारी कर भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने की चेतावनी दी है। ग्वालियर के जिला कलेक्टर ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय अवसरों पर संयम बरतें और सार्वजनिक शांति बनाए रखें। इसके अलावा, प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए उचित अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था हो।

ग्वालियर में गांधी जयंती के दौरान हुआ यह झंडा विवाद न केवल राजनीतिक दलों की संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राष्ट्रीय अवसरों पर भी राजनीतिक एक-upmanship हावी हो सकती है। स्थानीय समुदाय और प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जाए ताकि गांधी जी के आदर्शों का सम्मान बना रहे। इस बीच, पुलिस और प्रशासन ने शहर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने का फैसला किया है।

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