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by-Ravindra Sikarwar

गौण नहीं, बल्कि चुपके से चलने वाली खुफिया रणनीति के तहत Silicon Valley (अमेरिका) में तकनीकी कंपनियों के कर्मचारियों को लुभाने के लिए Russia और China की खुफिया एजेंसियों से जुड़े ऑपरेटिव सक्रिय हो रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से आकर्षक महिलाएं (female operatives) शामिल हैं, जिन्हें “हनीट्रैप” या “सेक्स पायनियर” के रूप में तैयार किया गया है।

कैसे होता है यह खेल?

  • पहले चरण में: लक्ष्य व्यक्ति (target) के आस-पास आना — उदाहरण के लिए उसके कॉफी शॉप, जिम या सोशल मीडिया प्रोफाइल पर कम-कम दिखना। ऑपरेटिव जानबूझकर लगभग “सात बार” उसकी दिनचर्या में घुल मिलकर भरोसा बनाएती है।
  • अगला चरण है “लव बॉम्बिंग” (love bombing) — तारीफों, फ्लर्टिंग मैसेज, सेल्फ़ी, असहाय दृष्टिकोण का दिखावा (जैसे “मेरे माता-पिता मर गये”, “मैं छात्र हूँ”, “मेरे पास पैसे नहीं हैं”) ताकि टार्गेट में ‘मुझसे मदद करो’ जैसी ही भावना जाग उठे।
  • उसके बाद आता है “मिल्क तकनीक” (milk technique) — जहां ऑपरेटिव अपनी मित्रमंडल या फैमिली कनेक्शनों को नकली दिखाती हैं, जैसे “मेरे भाई के दोस्त बिल हैं, वो तुम्हारे इंस्टा में भी हैं” आदि, ताकि विश्वसनीयता बने।
  • अंततः, जब भरोसा स्थापित हो जाता है, तो भावना-उलझाव (emotional manipulation) एवं धमकी-जाल शुरू होता है: “अगर तुमसे अभी जानकारी नहीं मिली, तो मैं हमेशा के लिए चली जाऊँगी” — इस तरह लक्ष्य को दबाव में लिया जाता है।

विशेष रूप से तकनीकी कर्मियों को क्यों निशाना बनाया जाता है?
तकनीकी क्षेत्र (विशेषकर सिलिकॉन वैली) में काम करने वाले लोग अक्सर अलग जीवनशैली वाले होते हैं — लंबे समय तक काम, सामाजिक संबंधों का कम-होना। ऐसे व्यक्ति ‘सिंगल’ या कम सामाजिक नेटवर्क वाले ज्यादा होते हैं। ऐसे में भरोसा जीतना आसान माना जाता है।

इस तरह के अभियान में डिजिटल हैकिंग या साइबर हमला मुख्य माध्यम नहीं हैं, बल्कि मानव-संपर्क (human-interaction) व भावनात्मक मनोविज्ञान का इस्तेमाल हो रहा है — इसे विशेषज्ञ ‘सेक्स वॉरफेयर’ का नया रूप कहते हैं।

रणनीतिक और वैश्विक मायने:
इस प्रकार की खुफिया गतिविधियाँ सिर्फ व्यक्तिगत प्रायोजन नहीं हैं — यह अमेरिका-चीन-रूस के बीच टेक्नोलॉजी व बौद्धिक संपदा (intellectual property) के नए युद्ध का हिस्सा मानी जा रही हैं।

उदाहरण के लिए : अमेरिका में इस तरह की ‘सोडा-ओपरेशन’ (so-called “sex warfare”) को उस लीगल व सामाजिक संरचना की खामी माना जा रहा है जहाँ व्यक्तिगत संबंधों व तकनीकी नवाचारों के बीच सुरक्षा खतरों को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं किया गया था।

चुनौतियाँ एवं सुझाव:
सुझाव के रूप में यह कहा जा रहा है कि तकनीकी कंपनियों, स्टार्ट-अप्स व शोध संस्थानों को अपने कर्मचारियों में संबंधों में सावधानी, अनजान लिंक्डइन रिक्वेस्ट्स की जाँच, रातों-रात रिश्तों में भरोसा करने से बचाव जैसे प्रशिक्षण देना चाहिए।

चुनौती यह है कि पारंपरिक खुफिया एवं सुरक्षा प्रणाली साइबर और डाटा-साइबर एंगल के हिसाब से तैयार हैं, लेकिन मानव-मनोवैज्ञानिक और सामाजिक इंजीनियरिंग (social engineering) के इस रूप के लिए अभी कम तैयारी है।

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