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स्कूल में बच्चों पर असामान्य जिम्मेदारी

By: Ishu Kumar

Child labour : जिला गौरेला पेड्रा मरवाही के चुकतीपानी क्षेत्र की प्राथमिक शाला बाजारडाँड़ से सामने आए एक वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को मध्यान्ह भोजन के लिए जंगल से लकड़ियाँ लाने का काम दिया गया है। बच्चे अपने कंधों पर लकड़ियों का गट्ठर उठाकर स्कूल परिसर की ओर जाते दिख रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि यह काम रोज होता है या नहीं, तो मासूमियत से उन्होंने बताया कि यह रोज का नियम है।

यह घटना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। पढ़ाई के समय बच्चों को ईंधन जुटाने में लगाना न सिर्फ शिक्षा के दृष्टिकोण से बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है।

प्रशासन की चुप्पी और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया

Child labour मामला सामने आने के बाद स्थानीय सरपंच और संकुल प्रभारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने कहा कि वीडियो उनके संज्ञान में है और इसे बेहद निंदनीय पाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्या हल नहीं होगी। स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई और सुरक्षा का वातावरण उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

क्या बच्चों के हाथों में फिर लौटेंगी किताबें?

Child labour सरकार मध्यान्ह भोजन योजना के माध्यम से बच्चों को स्कूल से जोड़ने और पोषण देने का दावा करती है, लेकिन इस वीडियो में वास्तविकता कुछ और ही दिखाई दे रही है। सवाल उठता है कि क्या जांच के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई होगी या वास्तव में बच्चों के कंधों से लकड़ी का बोझ हटाकर उनके हाथों में किताबें लौटेंगी।

इस मामले ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि बालश्रम पर रोक और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। अब उम्मीद यही है कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करके बच्चों को उनका हक—शिक्षा और सुरक्षा—दे।

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