by-Ravindra Sikarwar
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है: वर्ष 2028 तक मध्यप्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाना। उन्होंने यह घोषणा दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से की है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है।
गाय के दूध की खरीद और ज्यादा कीमत:
अब तक, राज्य में भैंस के दूध की खरीद पर अधिक जोर दिया जाता था। लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अब गाय का दूध भी खरीदेगी। उन्होंने यह भी कहा कि गाय के दूध की खरीद पर ज्यादा कीमत दी जाएगी। यह फैसला विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाएगा जो मुख्य रूप से गाय पालन करते हैं।
इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि गाय पालन एक महत्वपूर्ण आजीविका का साधन है। किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिलने से वे और अधिक पशुपालन के लिए प्रोत्साहित होंगे।
दुग्ध उत्पादन में तेजी लाने के उपाय:
सरकार ने दुग्ध उत्पादन में तेजी लाने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर काम करने की योजना बनाई है:
- उन्नत पशु नस्लें: किसानों को अधिक दूध देने वाली गायों और भैंसों की उन्नत नस्लें उपलब्ध कराई जाएंगी।
- पशु स्वास्थ्य सेवाएँ: पशुओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, जैसे कि नियमित टीकाकरण और चिकित्सा शिविर, आयोजित किए जाएँगे।
- चारा और पोषण: पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- तकनीकी सहायता: किसानों को दुग्ध उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- शीत श्रृंखला का विस्तार: दूध के संग्रह और प्रसंस्करण के लिए राज्य में शीत श्रृंखला (Cold Chain) के नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे दूध को खराब होने से बचाया जा सके और उसे दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके।
क्यों ‘मिल्क कैपिटल’ बनना है जरूरी?
मध्यप्रदेश देश के सबसे बड़े कृषि राज्यों में से एक है। यहाँ पशुपालन की अपार संभावनाएँ हैं। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर राज्य न केवल किसानों की आय बढ़ा सकता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो सकता है। ‘मिल्क कैपिटल’ का दर्जा प्राप्त करने से राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह पहल राज्य में श्वेत क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे ग्रामीण विकास को एक नई गति मिलेगी।
