By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले की एक घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया है। जनजातीय आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं पर कथित हमले तथा धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के खिलाफ सर्व समाज ने 24 दिसंबर को प्रदेश बंद का आह्वान किया। इस बंद को छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज सहित कई व्यापारिक, सामाजिक और जनजातीय संगठनों का व्यापक समर्थन मिला है। बंद शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। यह आंदोलन जनजातीय समाज की पहचान और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए शुरू किया गया है।
कांकेर घटना: विवाद की जड़ और हिंसक झड़पें
कांकेर जिले के अंतागढ़ क्षेत्र में बड़े तेवड़ा गांव में एक शव दफनाने को लेकर दो समुदायों के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ। गांव के सरपंच के पिता की मृत्यु के बाद परिवार ने निजी जमीन पर ईसाई रीति से दफनाया, जबकि स्थानीय जनजातीय समुदाय ने इसे पारंपरिक आदिवासी रिवाजों का उल्लंघन बताया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कृत्य जनजातीय संस्कृति और देव प्रथा के विरुद्ध था।
विवाद ने उग्र रूप ले लिया, जिसमें पुलिस की मौजूदगी के बावजूद झड़पें हुईं। कई ग्रामीण घायल हुए, पुलिसकर्मी चोटिल हुए और कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए फ्लैग मार्च निकाला और अतिरिक्त बल तैनात किया। सर्व समाज ने इस घटना को जनजातीय आस्था पर संगठित हमला करार देते हुए प्रशासनिक पक्षपात के भी आरोप लगाए। संगठन का कहना है कि ऐसे मामले राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं, जो सामाजिक तनाव का कारण बन रहे हैं।
बंद का आह्वान और व्यापक समर्थन
सर्व समाज छत्तीसगढ़ ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बंद की घोषणा की। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी विशेष धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रलोभन या दबाव से हो रहे धर्मांतरण, जनजातीय परंपराओं पर आघात और कानून-व्यवस्था की सुरक्षा के लिए है। बंद को शांतिपूर्ण और संवैधानिक रखने की अपील की गई है।
इस आह्वान को छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (सीसीसीआई) ने पूर्ण समर्थन दिया। चैंबर की बैठक में फैसला लिया गया कि व्यापारी समाज विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और अन्य व्यापारिक संघों ने भी दुकानें बंद रखने का ऐलान किया। थोक और खुदरा बाजारों में बंद का असर दिखा, जबकि आवश्यक सेवाएं जैसे अस्पताल और दवाइयां उपलब्ध रहीं। कई जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे गए।
मांगें और घर वापसी की घटनाएं
सर्व समाज ने पांच सूत्री मांगें रखी हैं, जिनमें धर्म स्वातंत्र्य कानून को सख्ती से लागू करना, दोषियों पर कार्रवाई, घायलों को मुआवजा और ग्रामीणों पर दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है। संगठन ने कांकेर के एसपी के तबादले की भी मांग की, जिस पर सरकार ने कार्रवाई की।
घटना के बाद कुछ सकारात्मक बदलाव भी देखे गए। कांकेर क्षेत्र में कई लोग मूल जनजातीय धर्म और संस्कृति की ओर लौट रहे हैं। एक चर्च नेता सहित कई परिवारों ने विधिवत घर वापसी की और पारंपरिक देवी-देवताओं की पूजा शुरू की। इन लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज की असली पहचान प्रकृति पूजा, सामूहिक मूल्यों और सदियों पुरानी परंपराओं में है। ऐसे कदमों से सामाजिक समरसता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
व्यापक प्रभाव और भविष्य की चिंताएं
यह बंद छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे धर्मांतरण विवादों का प्रतीक बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दे सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और इन्हें संवाद से सुलझाना जरूरी है। राज्य सरकार ने स्थिति पर नजर रखते हुए शांति की अपील की है। बंद के दौरान प्रमुख शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जगदलपुर में बाजार बंद रहे, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हुआ।
यह आंदोलन जनजातीय अधिकारों और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर नीतिगत स्तर पर चर्चा की जरूरत है, ताकि राज्य में शांति और एकता बानी रहे।
