By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र विशेष इसलिए है क्योंकि यह अटल नगर (नवा रायपुर) में स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन में आयोजित किया जाएगा। इस भवन का उद्घाटन इसी साल 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। सत्र की तैयारियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने गुरुवार को नए भवन में ही पत्रकारों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण सत्र चार दिनों का होगा और इसमें कई गैर-राजनीतिक तथा विकासोन्मुखी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सत्र के पहले दिन यानी 14 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के लिए ‘विजन 2047’ पर व्यापक चर्चा होगी। डॉ. रमन सिंह ने इस विषय को पूरी तरह गैर-राजनीतिक करार देते हुए कहा कि राज्य के भविष्य को लेकर सभी दलों से सर्वसम्मति और सक्रिय भागीदारी की उम्मीद है। उनका मानना है कि विजन 2047 राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा। यह चर्चा राज्य की 25वीं वर्षगांठ के संदर्भ में और भी खास हो जाती है, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ था।
एक दिलचस्प बात यह है कि सत्र की शुरुआत रविवार को हो रही है। इसकी वजह बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की सबसे पहली बैठक 14 दिसंबर 2000 को हुई थी। इसी परंपरा को बनाए रखने और नए भवन में ऐतिहासिक निरंतरता के लिए इस तारीख को चुना गया है। यह प्रतीकात्मक रूप से राज्य की विधायी यात्रा की स्मृति को ताजा रखेगा। अब तक विधानसभा ने 76 सत्र आयोजित किए हैं, जिनमें कुल 773 बैठकें हुईं और कार्यवाही की कुल अवधि 3456 घंटे 19 मिनट रही है।
सत्र के दूसरे दिन सरकार की ओर से चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इस बजट पर 16 दिसंबर को विस्तृत चर्चा होगी। अनुपूरक बजट में विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है, जो विकास योजनाओं और आपात जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। इसके अलावा, सरकार ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक को सदन में पेश करने की सूचना दी है। यह विधेयक श्रमिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े नियमों में बदलाव ला सकता है।
नए विधानसभा भवन की सजावट और डिजाइन भी चर्चा का विषय बनी हुई है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि भवन के गलियारों और दीवारों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं से सजाया जा रहा है। बस्तर की आदिवासी कला से लेकर सरगुजा की लोक परंपराओं तक पूरे राज्य की झलक दिखाई देगी। इसके लिए संस्कृति विभाग को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए संसद भवन की सजावट से भी प्रेरणा ली जा रही है ताकि भवन न केवल आधुनिक हो बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बने।
विधानसभा अब डिजिटल युग की ओर तेजी से बढ़ रही है। अध्यक्ष ने गर्व से बताया कि पेपरलेस कार्यप्रणाली को अपनाने में बड़ी सफलता मिली है। इस सत्र के लिए लगभग 96 प्रतिशत प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (चिप्स) की मदद से पूरी विधानसभा को पेपरलेस बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इससे न केवल कागज की बचत होगी बल्कि कार्यवाही में पारदर्शिता और गति भी बढ़ेगी। विधायकों को टैबलेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
यह शीतकालीन सत्र छोटा होने के बावजूद राज्य के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। नए भवन में पहला सत्र होने से विधायकों में उत्साह है और उम्मीद की जा रही है कि चर्चाएं सौहार्दपूर्ण तथा रचनात्मक रहेंगी। भ्रष्टाचार मुक्त और विकासोन्मुखी शासन की दिशा में यह सत्र एक नया अध्याय लिख सकता है। जनता भी उम्मीद कर रही है कि विजन 2047 की चर्चा से राज्य के दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव पड़ेगी। कुल मिलाकर, यह सत्र छत्तीसगढ़ की विधायी परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करेगा।
