By: Ravindra Sikarwar
इंदौर न्यूज़: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से होने वाली दुखद घटनाओं के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने नगर निगम के आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया है और उनकी जगह आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को नया नगर निगम कमिश्नर नियुक्त किया है। इस निर्णय के बाद, राज्य में प्रशासनिक सुधारों का सिलसिला तेज हो गया है।
क्षितिज सिंघल का प्रोफाइल
आईएएस क्षितिज सिंघल, जो 2014 बैच के अधिकारी हैं, पहले मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के डायरेक्टर के रूप में कार्य कर रहे थे। अब वे इंदौर नगर निगम के कमिश्नर के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण कई लोग अपनी जान गंवा चुके थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है।
भागीरथपुरा की घटना और सरकार की प्रतिक्रिया
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से पांच दिनों के भीतर 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से इंदौर नगर निगम के कई जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की लापरवाही को गंभीरता से लिया और प्रदेश भर के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद, सुधारात्मक कदम उठाने की योजना बनाई।
इसके तहत नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव के अलावा अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जलकार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इस कदम के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं न हों। सीएम डॉ. मोहन यादव ने सभी नगर निगमों के महापौर, आयुक्त, जिला कलेक्टर और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की और सुधारात्मक उपायों पर चर्चा की।
अधिकारियों पर कार्रवाई का उद्देश्य
भागीरथपुरा कांड के बाद हुई इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक जिम्मेदारी की दृढ़ता को बनाए रखना था। घटना के बाद, कई जिम्मेदार अधिकारियों ने घटना को लेकर स्पष्ट और सटीक जानकारी नहीं दी थी, जिससे और भी नागरिकों के बीच विश्वास की कमी पैदा हुई। यह कदम यह साबित करता है कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सीएम डॉ. मोहन यादव का बयान
सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस घटनाक्रम पर बयान देते हुए कहा, “हमने इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं का पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए एक समयबद्ध सुधारात्मक कार्यक्रम तैयार किया गया है, और हम प्रदेश के सभी नगर निगमों में निगरानी बढ़ा रहे हैं।”
वहीं, सीएम ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हालात की समीक्षा की और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।
भागीरथपुरा की घटनाओं के दौरान अफसरों का रवैया
जब इंदौर को कोई पुरस्कार या सम्मान मिलता है, तो जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद होते हैं। लेकिन जब किसी मामले में जिम्मेदारी तय करने और सजा देने का वक्त आता है, तो अधिकारियों को ही आगे कर दिया जाता है। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में भी यही देखा गया, जहां अधिकारियों की लापरवाही के कारण कार्रवाई की गई। इस मामले में जब मौत के आंकड़े बढ़े, और पानी की गुणवत्ता में निगम की खामी सामने आई, तो सरकार ने कार्रवाई की और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।
इस घटना ने प्रशासनिक और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखा जाएगा कि आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल के नेतृत्व में इंदौर नगर निगम में क्या सुधार किए जाते हैं।
प्रशासनिक सुधार की दिशा
नव नियुक्त आयुक्त, आईएएस क्षितिज सिंघल के सामने अब एक बड़ी चुनौती होगी—इंदौर नगर निगम में कामकाजी तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता को सुधारना। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी इलाके में दूषित पानी की समस्या उत्पन्न न हो और नागरिकों को सही तरीके से जल आपूर्ति हो। साथ ही, उनके सामने अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का भी दबाव होगा।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से कहा है कि प्रदेश के हर नगर निगम को सख्त निगरानी में रखा जाएगा और समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
यह कदम इंदौर नगर निगम और प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब यह देखना होगा कि प्रशासनिक सुधार के बाद इंदौर में जनसेवा में सुधार होता है या नहीं।
